दिल्ली में दिवाली पर सबसे बड़ा धमाका! झुग्गी वालों को मिलेंगे पक्के फ्लैट, 20 लाख लोगों की चमकी किस्मत!
दिवाली के मौके पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सरकार ने राजधानी की झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लाखों परिवारों के लिए नई आवास नीति का ऐलान किया है। दिल्ली सरकार द्वारा अधिसूचित 'दिल्ली झुग्गी-झोपड़ी पुनर्स्थापन और पुनर्वास नीति, 2026' के जरिए शहर की करीब 675 जेजे बस्तियों में रहने वाले लगभग 20 लाख लोगों को चरणबद्ध तरीके से पक्के मकान दिए जाएंगे। दिल्ली गजट में चार नवंबर को प्रकाशित यह नई नीति वर्ष 2010 के दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) के पुराने नियमों की जगह लेगी। नीति का मुख्य उद्देश्य पात्र झुग्गीवासियों को सुरक्षित छत मुहैया कराने के साथ-साथ विकास कार्यों के लिए सरकारी जमीनों को अतिक्रमण मुक्त कराना है।
कुल दो लाख रुपये का करना होगा अंशदान
इस नई योजना के तहत पात्र लाभार्थी परिवारों को कुल दो लाख रुपये का अंशदान जमा करना होगा। इसमें 1.5 लाख रुपये वैकल्पिक आवास के लिए और 50,000 रुपये शुरुआत के 5 वर्षों तक कॉमन एरिया के रखरखाव शुल्क (मेंटिनेंस) के रूप में लिए जाएंगे। इसके बदले में सरकार 25 वर्ग मीटर से अधिक कारपेट एरिया वाला एक बेडरूम का पक्का फ्लैट देगी, जिसमें बेडरूम, लिविंग रूम, रसोई, शौचालय, बाथरूम और बालकनी की पूरी सुविधा होगी। हालांकि बिजली, पानी, हाउस टैक्स और संबंधित नागरिक सेवाओं के बिलों का भुगतान निवासियों को खुद करना होगा।
नीति में पात्रता के कड़े मानदंड तय किए गए हैं, जिसके तहत कट-ऑफ डेट 1 जनवरी 2025 रखी गई है। यानी केवल वही परिवार इस योजना के हकदार होंगे जो 1 जनवरी 2025 से पहले संबंधित झुग्गी बस्ती में रह रहे थे। आवेदक का भारतीय नागरिक होना और उम्र कम से कम 18 वर्ष होना जरूरी है। साथ ही उसका नाम 1 जनवरी 2025 से पहले की वोटर लिस्ट और आधिकारिक सर्वे वाले साल की मतदाता सूची में दर्ज होना अनिवार्य रहेगा। पहचान की पुष्टि के लिए आवेदक और उसके परिवार के सदस्यों का बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा। सरकारी सेवा में तैनात कर्मियों या देशभर में कहीं भी पहले से पक्के मकान के मालिकों को इस नीति से पूरी तरह बाहर रखा गया है।
प्रमाण के तौर पर आवेदकों को 10 निर्धारित सरकारी दस्तावेजों में से कम से कम एक ऐसा कागजात दिखाना होगा, जो कट-ऑफ तारीख से पहले उसी पते पर जारी हुआ हो। इनमें फोटोयुक्त राशन कार्ड, बिजली बिल, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट अथवा बैंक-डाकघर पासबुक शामिल हैं। नीति में एक परिवार को केवल एक ही आवास आवंटित करने का सख्त नियम रखा गया है, भले ही अलग-अलग मंजिलों पर स्वतंत्र रूप से रहने वाले परिवारों को नियमों के तहत अलग से परखा जाए। प्रशासन प्राथमिकता के तौर पर लोगों को उनके वर्तमान ठिकाने से तीन किलोमीटर के दायरे में ही बसाने का प्रयास करेगा, लेकिन यदि तकनीकी, ढांचागत या सुरक्षा कारणों से यह संभव न हुआ तो दिल्ली में किसी अन्य जगह भी स्थानांतरित किया जा सकता है।
सरकार ने आवंटन के बाद मकान के दुरुपयोग पर भी सख्त पाबंदियां लगाई हैं। योजना के तहत मिलने वाले फ्लैट 10 साल के लॉक-इन पीरियड के साथ लीजहोल्ड पर दिए जाएंगे, जिन्हें इस अवधि से पहले न तो बेचा जा सकेगा और न ही ट्रांसफर किया जाएगा। 10 साल पूरे होने और सभी बकाया चुकाने के बाद ही इनका मालिकाना हक मिल सकेगा। इसके अलावा फ्लैट को किराए पर देने या जीपीए (जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी) के जरिए किसी और को सौंपने पर पूरी रोक रहेगी। यदि किसी व्यक्ति ने दोबारा किसी सरकारी जमीन पर कब्जा किया, तो उसका आवंटित फ्लैट तुरंत रद्द कर जब्त कर लिया जाएगा। योजना से असंतुष्ट या अयोग्य पाए गए लोग आदेश के 30 दिनों के भीतर अपीलीय प्राधिकरण के सामने अपनी अर्जी दाखिल कर सकते हैं।