'खाकी ही लूट रही वोट!' पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते ही थाने पहुंचे हुमायूं कबीर, जानें पूरा ड्रामा

'खाकी ही लूट रही वोट!' पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते ही थाने पहुंचे हुमायूं कबीर, जानें पूरा ड्रामा

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले की रेजिनगर विधानसभा सीट पर चल रहे उपचुनाव के दौरान सियासी पारा अचानक चढ़ गया। आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नौदा से विधायक हुमायूं कबीर को मतदान केंद्र से बाहर निकलते ही पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पुलिस का दावा है कि कबीर मतदान के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति को बिगाड़ने का प्रयास कर रहे थे। वहीं, इस कार्रवाई के बाद से इलाके में राजनीतिक तनाव बढ़ गया है और भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया है।

गिरफ्तारी से ठीक पहले हुमायूं कबीर ने पुलिस प्रशासन पर चुनावी प्रक्रिया को सीधे तौर पर प्रभावित करने का खुला आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार खाकी खुद कई बूथों पर वोटिंग में बाधा डाल रही है। कबीर ने कड़े शब्दों में सवाल उठाया कि जब राज्य में सरकार पहले से ही पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में है, तो फिर आम जनता के वोटों को हाइजैक करने की आखिर क्या मजबूरी आ गई है।

अपने आरोपों को विस्तार देते हुए एजेयूपी प्रमुख ने 23 अप्रैल को हुए पिछले विधानसभा चुनावों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि उस समय मतदान पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा था और किसी तरह की प्रशासनिक मनमानी नहीं देखी गई थी। हालांकि, पिछले दो महीनों में हालात तेजी से बदले हैं और स्थानीय लोगों पर पुलिसिया दबाव व अत्याचार बढ़ा है। कबीर ने यह भी दावा किया कि पुलिस अब तक उनके 64 कार्यकर्ताओं और समर्थकों को बेवजह हिरासत में ले चुकी है, जिन्हें तुरंत रिहा किया जाना चाहिए।

हुमायूं कबीर के इस तीखे बयान के कुछ ही देर बाद पुलिस हरकत में आई और उन्हें गाड़ी में बैठाकर सीधे रेजिनगर थाने ले गई। हालांकि अधिकारियों ने गिरफ्तारी की सटीक धाराओं और विस्तृत कारणों को लेकर आधिकारिक बयान सार्वजनिक नहीं किया है। रेजिनगर उपचुनाव इस बार बेहद प्रतिष्ठा की लड़ाई माना जा रहा है क्योंकि यह सीट खुद कबीर के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। तृणमूल कांग्रेस से निलंबन और फिर निष्कासन के बाद उन्होंने अपनी पार्टी एजेयूपी बनाई थी। बाद में नौदा सीट जीतकर विधानसभा पहुंचे कबीर ने रेजिनगर के चुनावी मैदान में अपने बेटे गुलाम नबी आजाद को उतारा है, जिसके चलते मुकाबला बेहद कड़ा और संवेदनशील बन गया है।