'हथियार खिलौना नहीं है!' साड़ी में AK-47 लहराने पर फंसीं IPS अंकिता शर्मा, पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल भड़के

'हथियार खिलौना नहीं है!' साड़ी में AK-47 लहराने पर फंसीं IPS अंकिता शर्मा, पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल भड़के

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले की पुलिस अधीक्षक (एसपी) अंकिता शर्मा का विजयादशमी पर किया गया शस्त्र प्रदर्शन अब राष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा मानकों की बहस में तब्दील हो गया है। पुलिस लाइन में पारंपरिक अनुष्ठान के दौरान साड़ी पहने आईपीएस अधिकारी द्वारा एके-47 राइफल से दनादन गोलियां बरसाने का फुटेज सामने आने के बाद रक्षा और सुरक्षा गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। इस पूरे घटनाक्रम पर भारतीय सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों ने कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे घोर लापरवाही करार दिया है और मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग उठाई है।

विजयादशमी के मौके पर राजनांदगांव पुलिस लाइन में पारंपरिक शस्त्र पूजन का आयोजन रखा गया था। इस दौरान जिले की पुलिस कप्तान अंकिता शर्मा ने पूजा के तुरंत बाद सरकारी असॉल्ट राइफल हाथ में थामी और देखते ही देखते नौ राउंड हवाई फायर झोंक दिए। पुलिस और सुरक्षा बलों में दशहरे पर हथियारों की अर्चना की परंपरा दशकों पुरानी है, लेकिन भरी हुई राइफल से सार्वजनिक परिसर में इस तरह ताबड़तोड़ फायरिंग करने का यह वीडियो इंटरनेट पर वायरल होते ही सवालों के घेरे में आ गया।

सेना के पूर्व शीर्ष अधिकारी केजेएस ढिल्लों ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट (एक्स) के जरिए वीडियो में वेपन हैंडलिंग ड्रिल की गंभीर खामियों को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आग्नेयास्त्रों के संचालन का पहला नियम यह मानकर चलना होता है कि हथियार हर हाल में लोडेड है। वीडियो फुटेज का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि फायरिंग के दौरान लोडेड राइफल का बैरल अलग-अलग दिशाओं में घूमता दिख रहा है, जो किसी भी आकस्मिक मिसफायर की स्थिति में आसपास खड़े लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकता था।

पूर्व सैन्य कमांडर ने वीडियो की पृष्ठभूमि में मौजूद पुलिसकर्मियों और अन्य नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई, जहां कुछ लोग स्पष्ट रूप से सहमे नजर आए। इसके अलावा उन्होंने सर्विस वेपन के नियम विरुद्ध इस्तेमाल और ड्रेस कोड का मुद्दा भी उठाया। ढिल्लों के मुताबिक, पुलिस बल के अधिकृत हथियारों का संचालन तय प्रक्रियाओं, निर्धारित फायरिंग रेंज और आधिकारिक वर्दी में ही किया जाना चाहिए, न कि गैर-अधिकृत पोशाक में सार्वजनिक प्रदर्शन के तौर पर। बुनियादी प्रोटोकॉल की यह अनदेखी अब राज्य पुलिस महकमे के भीतर भी चर्चा का विषय बन चुकी है।