न बारूद, न डेटोनेटर... श्रीगंगानगर रेलवे ट्रैक धमाके का पैटर्न बना पहेली, क्या ये बड़े हमले का 'ट्रायल ब्लास्ट' था?
राजस्थान के भारत-पाक सीमा से सटे संवेदनशील जिले श्रीगंगानगर में रेलवे ट्रैक पर हुए अचानक धमाके ने देश की शीर्ष सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जांच में जब मौका-ए-वारदात से न तो पारंपरिक बारूद का कोई अंश मिला और न ही किसी डेटोनेटर के अवशेष मिले, तो जांच अधिकारियों के होश उड़ गए। धमाके की तीव्रता इतनी थी कि पटरियों के आसपास की गिट्टियां बिखर गईं और लोहे की पटरी पर असर पड़ा, लेकिन किसी भी जाने-माने विस्फोटक का इस्तेमाल न होना इस पूरी घटना को एक रहस्यमयी पहेली बना रहा है। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA), इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीमों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर इलाके की घेराबंदी कर दी है। सुरक्षा एजेंसियों का सबसे बड़ा सिरदर्द यह सवाल है कि अगर पारंपरिक बारूद नहीं था, तो आखिर किस केमिकल कंपोजिशन या आधुनिक तकनीक के जरिए इस ब्लास्ट को अंजाम दिया गया।
क्या देश को दहलाने की साजिश का था यह 'ट्रायल ब्लास्ट'? सीमावर्ती इलाके में अलर्ट जारी
श्रीगंगानगर जिला भौगोलिक रूप से पाकिस्तान सीमा के बेहद करीब स्थित है, जहां से ड्रोन के जरिए हथियार और ड्रग्स की तस्करी के मामले अक्सर सामने आते रहते हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय सीमा के इतने पास रेलवे ट्रैक जैसे अति-महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर पर इस तरह के अनूठे पैटर्न का धमाका होना किसी बड़ी आतंकी साजिश की ओर इशारा कर रहा है। सुरक्षा विशेषज्ञों और फॉरेंसिक अधिकारियों को अंदेशा है कि असामाजिक तत्व या देशविरोधी ताकतें किसी बड़े हमले को अंजाम देने से पहले नए प्रकार के विस्फोटकों की मारक क्षमता और पुलिस के रिस्पॉन्स टाइम को जांचने के लिए यह 'ट्रायल ब्लास्ट' (Trial Blast) कर सकती हैं। यदि यह परीक्षण सफल माना गया, तो भविष्य में व्यस्त रेल मार्गों और यात्री ट्रेनों को निशाना बनाने का बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। इसी आशंका के चलते पूरे उत्तर-पश्चिम रेलवे क्षेत्र और सीमावर्ती इलाकों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।
फॉरेंसिक टीम और एनएसजी की एंट्री: लैब टेस्ट से खुलेगा उस 'अज्ञात केमिकल' का राज
घटनास्थल से एकत्र किए गए मिट्टी, पटरियों के टुकड़ों और रसायनों के नमूनों को राज्य फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) के साथ-साथ केंद्रीय फॉरेंसिक लैब में भेजा गया है। फॉरेंसिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस धमाके में किसी बेहद उन्नत लिक्विड एक्सप्लोसिव या घर में आसानी से उपलब्ध होने वाले रसायनों के अनूठे मिश्रण का प्रयोग किया गया हो सकता है, जिसे सामान्य मेटल डिटेक्टर्स या स्निफर डॉग्स आसानी से नहीं पकड़ पाते। राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) के बम निरोधक दस्ते ने भी धमाके के पैटर्न का अध्ययन शुरू कर दिया है। तकनीकी टीम यह जांचने में जुटी है कि क्या इस ब्लास्ट को किसी रिमोट मैकेनिज्म या टाइमर-आधारित रासायनिक प्रतिक्रिया (Chemical Reaction) से ट्रिगर किया गया था। इस नए और अजीबोगरीब पैटर्न ने रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के लिए भी पटरियों की सुरक्षा को लेकर नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
रेलवे पटरियों की गश्त बढ़ाई गई, डिजिटल सर्विलांस और स्थानीय नेटवर्क खंगाल रही पुलिस
इस सनसनीखेज घटना के बाद से ही श्रीगंगानगर और आसपास के रेल मार्गों पर ट्रेनों का आवागमन बेहद सावधानी के साथ कराया जा रहा है। आरपीएफ और जीआरपी की संयुक्त टीमों ने पटरियों की चौबीसों घंटे पैदल गश्त शुरू कर दी है। इसके अतिरिक्त, पुलिस प्रशासन उस इलाके में सक्रिय मोबाइल टावरों के डंप डेटा को खंगाल रहा है ताकि धमाके के वक्त वहां मौजूद संदिग्ध मोबाइल नंबरों की पहचान की जा सके। आसपास के गांवों के लोगों से भी पूछताछ की जा रही है और सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। राजस्थान पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि जब तक फॉरेंसिक रिपोर्ट की पूरी डिटेल सामने नहीं आ जाती, तब तक किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। जांच एजेंसियां इस बात पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं कि इस अभूतपूर्व पैटर्न वाले ब्लास्ट के पीछे कौन सा स्थानीय या विदेशी नेटवर्क काम कर रहा है।