असम वाली जेनी की देवभूमि की सियासत में एंट्री, उसके बच्चे का पिता कौन? जल्द करेगी खुलासा
देवभूमि उत्तराखंड की राजनीति में उस वक्त अचानक भूचाल आ गया जब असम की रहने वाली चर्चित महिला 'जेनी' ने राज्य के राजनीतिक पटल पर कदम रखा। जेनी के इस कदम ने न केवल सत्ताधारी दल बल्कि विपक्ष के भी कई बड़े चेहरों की रातों की नींद हराम कर दी है। स्थानीय मीडिया और राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर जबरदस्त सुगबुगाहट शुरू हो गई है कि जेनी का उत्तराखंड के कई रसूखदार नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ पुराना नाता रहा है। देवभूमि पहुंचते ही जेनी ने जिस अंदाज में मीडिया से दूरी बनाते हुए सीधे राजनीतिक हलकों में खलबली मचाई है, उससे कई बड़े नेताओं के दामन पर दाग लगने का खतरा पैदा हो गया है। सोशल मीडिया से लेकर चाय की दुकानों तक हर जगह अब जेनी के इस चौंकाने वाले कदम की ही चर्चा हो रही है।
'मेरे बच्चे का पिता कौन?': जेनी के इस सीधे सवाल ने खड़े किए कई बड़े राजनीतिक और नैतिक सवाल
इस पूरे विवाद की सबसे संवेदनशील और तीखी कड़ी जेनी के बच्चे के पितृत्व (Paternity) को लेकर उठ रहा विवाद है। जेनी ने खुलकर मीडिया के सामने यह दावा किया है कि उसके बच्चे का पिता देवभूमि का ही एक बेहद ताकतवर और प्रभावशाली राजनीतिक चेहरा है। उसने आरोप लगाया कि लंबे समय से उसे और उसके बच्चे को उनका वाजिब हक देने से मुकरा जा रहा था और उसे लगातार चुप रहने की धमकियां दी जा रही थीं। जेनी ने स्पष्ट कर दिया है कि अब वह किसी भी कीमत पर पीछे हटने वाली नहीं है। उसने सार्वजनिक तौर पर घोषणा की है कि वह जल्द ही एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करके डीएनए रिपोर्ट (DNA Report) और तमाम डिजिटल सबूतों के साथ बच्चे के असली पिता के नाम का खुलासा करेगी। इस ऐलान के बाद से ही कयासों का बाजार गर्म है और कई नेताओं के नाम इस विवाद से जोड़े जाने लगे हैं।
पर्दे के पीछे की कहानी: क्या यह महज एक निजी विवाद है या रची जा रही है कोई बड़ी सियासी साजिश?
जेनी के इस हाई-प्रोफाइल एंट्री को लेकर उत्तराखंड के राजनीतिक विश्लेषक दो गुटों में बंटे हुए नजर आ रहे हैं। एक तरफ जहां इसे पीड़ित महिला की न्याय की लड़ाई माना जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग इसे आगामी चुनावों या राजनीतिक समीकरणों को बिगाड़ने के लिए रची गई एक गहरी साजिश के रूप में भी देख रहे हैं। विपक्षी पार्टियां इस मुद्दे को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं और सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग कर रही हैं। विपक्ष का कहना है कि अगर सत्ता से जुड़े किसी बड़े नेता की इस मामले में संलिप्तता है, तो उसके खिलाफ तुरंत कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, दूसरी ओर संबंधित खेमे की तरफ से इसे केवल छवि खराब करने का हनीट्रैप या राजनीतिक ब्लैकमेलिंग का हथकंडा बताया जा रहा है।
जल्द होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकीं सभी की निगाहें: देवभूमि की सियासत में आ सकता है बड़ा तूफान
फिलहाल पूरे उत्तराखंड की नजरें जेनी द्वारा बुलाई जाने वाली उस बहुचर्चित प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हैं, जिसमें वह उन सभी नामों और चेहरों को बेनकाब करने का दावा कर रही है। जेनी के सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं और उसने स्थानीय पुलिस प्रशासन से अपनी और अपने बच्चे की जान-माल की सुरक्षा की गुहार लगाई है। कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि जेनी अपने दावों के पक्ष में ठोस सबूत और डीएनए परीक्षण के दस्तावेज पेश करती है, तो यह मामला केवल बयानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें पॉक्सो (POCSO) या अन्य संगीन आपराधिक धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज हो सकती है। आने वाले कुछ दिन देवभूमि उत्तराखंड की राजनीति के लिए बेहद उथल-पुथल भरे साबित हो सकते हैं।