13 नगर निगम और 79 पालिकाओं में थमा मतदान, 10 हजार से अधिक उम्मीदवारों का भविष्य बैलेट में कैद
स्थानीय निकायों के लोकतंत्र के इस सबसे बड़े और महासंग्रामी पर्व में जनता जनार्दन ने अपना अंतिम और सर्वोपरि फैसला सुना दिया है। प्रदेश भर के 13 प्रमुख नगर निगमों और 79 नगर पालिका परिषदों के लिए चल रहा बहुप्रतीक्षित एवं धुआंधार मतदान आखिरकार शाम ढलते ही शांतिपूर्ण माहौल में पूरी तरह से संपन्न हो गया। सुबह से ही मतदान केंद्रों के बाहर मतदाताओं की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिलीं, जहां बुजुर्गों, महिलाओं और पहली बार वोट डाल रहे नवयुवकों ने भारी उत्साह के साथ अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग किया। इस व्यापक चुनावी प्रक्रिया के साथ ही मेयर, पार्षद, नगर पालिका अध्यक्ष और सभासद पदों के लिए मैदान में उतरे 10 हजार से भी अधिक उम्मीदवारों की राजनीतिक किस्मत और दावों का फैसला स्ट्रॉन्ग रूम में रखी बैलेट बॉक्स और ईवीएम मशीनों के भीतर सुरक्षित हो गया है। अब पूरे प्रदेश की निगाहें आने वाले मतगणना के दिन पर टिक गई हैं, जब वोटों की गिनती के साथ ही स्थानीय सत्ता की चाबी किसके हाथ जाएगी, यह साफ हो जाएगा।
निकाय चुनाव के इस चरण को राजनीतिक दलों के लिए मिनी-विधानसभा चुनाव के रूप में देखा जा रहा था। राज्य के शहरी मतदाताओं ने स्थानीय विकास, साफ-सफाई, सीवर लाइन, पेयजल आपूर्ति, सड़कों की स्थिति और स्थानीय कानून व्यवस्था को मुख्य मुद्दा बनाकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया है। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से निष्पक्ष, पारदर्शी और भयमुक्त मतदान सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा के बेहद कड़े और अभेद्य इंतजाम किए गए थे। सभी संवेदनशील और अति-संवेदनशील मतदान केंद्रों पर अतिरिक्त पुलिस बल, पीएसी और अर्धसैनिक बलों की तैनाती के साथ-साथ सीसीटीवी कैमरों व ड्रोन कैमरों के माध्यम से पल-पल की निगरानी रखी गई, जिसके चलते छिटपुट तू-तू-मैं-मैं और मामूली नोकझोंक को छोड़कर मतदान प्रक्रिया पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से निपट गई।
सुबह से ही पोलिंग बूथों पर दिखा वोटरों का जबरदस्त उत्साह, दिग्गजों ने भी डाला वोट
सुबह 7 बजे जैसे ही मतदान की शुरुआत हुई, पोलिंग बूथों पर अचानक से ही मतदाताओं का हुजूम उमड़ पड़ा। शुरुआती घंटों में ही कई इलाकों में रिकॉर्ड वोटिंग दर्ज की गई। शहरी और उपनगरीय इलाकों के मतदाताओं ने इस बात को साबित कर दिया कि वे अपने शहर और कस्बे की बुनियादी सुविधाओं को सुधारने के लिए कितने सजग हैं। विशेष रूप से महिला मतदाताओं की भागीदारी इस बार ऐतिहासिक देखने को मिली, जिन्होंने चूल्हा-चौका छोड़कर सबसे पहले मतदान केंद्र पहुंचकर अपना फर्ज निभाया। इसी तरह व्हीलचेयर पर बैठकर पहुंचे बुजुर्गों और दिव्यांग वोटरों के जज्बे ने भी सभी को प्रेरित किया।
देश और प्रदेश की राजनीति के कई नामचीन दिग्गजों, मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों ने भी सुबह-सुबह अपने-अपने स्थानीय पोलिंग बूथों पर पहुंचकर कतारों में लगकर अपने वोट डाले। मतदान के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए तमाम बड़े नेताओं ने अपनी-अपनी पार्टियों की बंपर जीत का दावा किया और जनता से अधिक से अधिक संख्या में वोट करने की अपील की। कई बूथों पर मतदाता सूची में नाम गायब होने या तकनीकी खराबी के कारण वोटरों को थोड़ी-बहुत दिक्कतों का सामना जरूर करना पड़ा, लेकिन चुनाव ड्यूटी में लगे अधिकारियों ने तत्परता दिखाते हुए स्थिति को तुरंत संभाल लिया और मतदान प्रक्रिया में कोई बड़ी बाधा नहीं आने दी।
13 नगर निगमों में मेयर पद के लिए कांटे की टक्कर, मुख्य दलों ने झोंकी थी पूरी ताकत
इस पूरे निकाय चुनाव में सबसे ज्यादा दिलचस्पी और उत्सुकता 13 बड़े नगर निगमों को लेकर बनी हुई है, जहां मेयर (महापौर) पद के लिए सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी साख दांव पर लगा रखी थी। सत्ताधारी पार्टी से लेकर मुख्य विपक्षी दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों ने इन नगर निगमों पर अपना परचम लहराने के लिए तूफानी चुनाव प्रचार किया था। मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों ने खुद मैदान में उतरकर दर्जनों जनसभाएं और रोड शो किए थे ताकि शहरी वोटरों को अपने पाले में लाया जा सके। इन 13 नगर निगमों की सीट न केवल शहर की सरकार तय करेगी, बल्कि यह आने वाले बड़े राजनीतिक चुनावों के लिए भी एक बड़ा मूड-सेट साबित होने वाली है।
मेयर पदों के अलावा 79 नगर पालिका परिषदों के अध्यक्ष और हजारों वार्डों के पार्षदों व सभासदों के लिए भी मुकाबला बेहद कड़ा और दिलचस्प रहा है। कई सीटों पर तो मुकाबला इतना नजदीकी माना जा रहा है कि वहां हार-जीत का अंतर महज कुछ दर्जन वोटों से तय होने की उम्मीद है। प्रत्याशियों ने अंतिम समय तक एक-एक वोट हासिल करने के लिए दिन-रात एक कर दिया था। अब चूंकि मतदान का काम पूरा हो चुका है, तो प्रत्याशियों और उनके समर्थकों ने अब हार-जीत का गुणा-गणित लगाना और बूथ वार वोटों का आंकड़ा जोड़ना शुरू कर दिया है।
सुरक्षा के अभेद्य इंतजाम: कड़े पहरे में सील की गईं बैलेट बॉक्स और ईवीएम
शाम को मतदान की समय सीमा समाप्त होते ही चुनाव अधिकारियों ने पोलिंग एजेंटों की मौजूदगी में सभी बैलेट बॉक्स और ईवीएम मशीनों को पूरी सील-मोहर के साथ बंद किया। इसके बाद भारी पुलिस बल और केंद्रीय सुरक्षा बलों की कड़ी निगरानी में सभी ईवीएम व बैलेट पेटियों को जिलों के केंद्रीय स्ट्रॉन्ग रूम तक सुरक्षित पहुंचाया गया। निर्वाचन आयोग के सख्त निर्देशों के मुताबिक, स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर तीन स्तरीय सुरक्षा घेरा बनाया गया है जहाँ 24 घंटे सीसीटीवी कैमरों से लाइव निगरानी की जा रही है। राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर बनी एलसीडी स्क्रीन के जरिए सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखने की अनुमति दी गई है।
राज्य निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके पूरी मतदान प्रक्रिया के सफलतापूर्वक संपन्न होने पर राहत की सांस ली और जनता व चुनाव ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों तथा पुलिसकर्मियों का आभार व्यक्त किया। आयोग ने बताया कि सभी 13 नगर निगमों और 79 नगर पालिकाओं में औसतन मतदान प्रतिशत बहुत ही संतोषजनक रहा है। अब प्रशासन का पूरा ध्यान मतगणना के दिन की तैयारियों पर केंद्रित हो गया है ताकि बिना किसी त्रुटि और विवाद के परिणाम घोषित किए जा सकें।
निष्कर्ष: जनता ने लिखा फैसला, अब काउंटिंग डे पर सामने आएगा कौन बनेगा शहर का सरताज
13 नगर निगमों और 79 नगर पालिकाओं में मतदान का यह महापर्व संपन्न होने के साथ ही लोकतंत्र का पहला चरण पूरा हो गया है। 10 हजार से अधिक प्रत्याशियों का राजनीतिक भविष्य अब पूरी तरह से लॉक हो चुका है और सभी की सांसें अब आने वाले नतीजों पर अटकी हुई हैं। जहां एक तरफ उम्मीदवारों के कार्यालयों और चौपालों पर चुनावी जीत-हार के कयास लगाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आम जनता को भी अपने नए मेयर और पालिका अध्यक्षों का इंतजार है। अब देखना यह होगा कि जब स्ट्रॉन्ग रूम के ताले खुलेंगे और वोटों की गिनती शुरू होगी, तो जनता का आशीर्वाद किस पार्टी और किस प्रत्याशी के सिर पर सजता है।