LPU हिंसा मामला: राजस्थान और यूपी के दो और युवकों की गिरफ्तारी से बढ़ा शिकंजा

LPU हिंसा मामला: राजस्थान और यूपी के दो और युवकों की गिरफ्तारी से बढ़ा शिकंजा

पंजाब के फगवाड़ा स्थित प्रतिष्ठित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) परिसर में कुछ समय पहले भड़की भारी हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी के मामले में पुलिस की जांच लगातार तेज होती जा रही है. इस हाई-प्रोफाइल मामले में पंजाब पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करते हुए राजस्थान और उत्तर प्रदेश के दो और युवकों को धर दबोचा है. इसके साथ ही इस पूरे उपद्रव और हिंसा के मामले में अब तक गिरफ्तार कुल आरोपियों की संख्या बढ़कर 9 से 11 तक पहुंच चुकी है, जबकि पुलिस ने वीडियो फुटेज और सोशल मीडिया रील्स के आधार पर 20 से अधिक उपद्रवी तत्वों की पहचान कर ली है. इस बड़ी कार्रवाई के बाद से अन्य संदिग्धों और छात्रों के बीच हड़कंप मच गया है, जो इस हिंसा के दौरान पथराव और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में शामिल थे.

क्या था पूरा LPU हिंसा मामला और कैसे भड़का था अचानक उपद्रव?

फगवाड़ा स्थित एलपीयू (LPU) कैंपस में यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर एक महिला छात्र के साथ अप्रिय घटना और कथित दुष्कर्म की अफवाहें तेजी से फैल गईं. हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने इन तमाम दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह से फर्जी और मनगढ़ंत करार दिया था, लेकिन तब तक सैकड़ों की संख्या में छात्र और कुछ बाहरी तत्व उग्र हो चुके थे. उग्र भीड़ ने कैंपस के भीतर जमकर तोड़फोड़ की, कई परिसरों को नुकसान पहुंचाया और पुलिस वाहनों को आग के हवाले कर दिया. इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने अमृतसर-दिल्ली नेशनल हाईवे (NH-44) को भी कई घंटों तक जाम रखा, जिससे कानून व्यवस्था की स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को भारी बल का प्रयोग करना पड़ा था और बाद में सुरक्षा के मद्देनजर विश्वविद्यालय को 10 दिनों के लिए बंद करना पड़ा था.

SIT की जांच में हुआ बड़ा खुलासा: तकनीकी सर्विलांस से पकड़े जा रहे बाहरी आरोपी

घटना की गंभीरता को देखते हुए पंजाब पुलिस ने कपूरथला के वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था. यह टीम लगातार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, वायरल वीडियो, इंस्टाग्राम रील्स और यूनिवर्सिटी के सीसीटीवी फुटेज को खंगालने में जुटी हुई है. जांच में यह बात सामने आई है कि इस हिंसक प्रदर्शन में केवल यूनिवर्सिटी के छात्र ही शामिल नहीं थे, बल्कि कई बाहरी लोग और अन्य राज्यों के युवक भी सोची-समझी साजिश के तहत इस भीड़ का हिस्सा बने थे. ताजा कार्रवाई में राजस्थान और उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले युवकों की गिरफ्तारी इस बात का सबूत है कि पुलिस अब राज्य की सीमाओं से बाहर जाकर भी मुख्य साजिशकर्ताओं और उपद्रवियों की धरपकड़ कर रही है. गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ के आधार पर कई अन्य महत्वपूर्ण सुराग भी हाथ लगे हैं.

20 से अधिक आरोपियों की हो चुकी है पहचान, जल्द होगी और बड़ी गिरफ्तारियां

पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने मीडिया को दी गई जानकारी में यह स्पष्ट किया है कि अब तक कुल 20 से अधिक ऐसे उपद्रवियों की पहचान पूरी तरह से कर ली गई है जिनकी संलिप्तता वीडियो और डिजिटल साक्ष्यों में साफ दिखाई दे रही है. इनमें से 9 से 11 आरोपियों को पुलिस अलग-अलग राज्यों से गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें कुछ LPU के छात्र हैं और कुछ अन्य बाहरी लोग शामिल हैं. पुलिस ने कई नामजद एफआईआर दर्ज की हैं जिनमें हत्या के प्रयास, सरकारी काम में बाधा, लोक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और दंगा फैलाने जैसी गंभीर धाराओं (BNS के तहत) को शामिल किया गया है. पुलिस का यह कड़ा संदेश है कि कानून हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और सभी आरोपियों को जल्द ही सलाखों के पीछे भेजा जाएगा.

यूनिवर्सिटी प्रबंधन और छात्रों के बीच सामान्य स्थिति बहाल करने के प्रयास

इस बड़ी हिंसा और तनाव के बाद LPU परिसर में स्थिति को सामान्य बनाने के लिए प्रबंधन लगातार प्रयास कर रहा है. विश्वविद्यालय के संस्थापकों और प्रबंधकों ने भी इस घटना को एक गहरी साजिश करार देते हुए कहा है कि अफवाहों के जरिए संस्थान की छवि को धूमिल करने की कोशिश की गई थी. हालांकि अब कक्षाओं के संचालन और छात्रों की सुरक्षा को लेकर कड़े दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं, और अभिभावक भी अपनी संतानों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन द्वारा की जा रही कड़ी कानूनी कार्रवाई से संतुष्ट नजर आ रहे हैं.