घरेलू क्रिकेट में मचाया गदर पर टीम इंडिया में मिला सिर्फ एक मौका, एक ही मैच में थम गया इन 6 दिग्गजों का वनडे करियर
भारतीय घरेलू क्रिकेट में सालों तक पसीना बहाने और लगातार शानदार प्रदर्शन करने के बाद ही किसी खिलाड़ी का टीम इंडिया की नीली जर्सी पहनने का सपना पूरा होता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का इतिहास कई ऐसे अनलकी खिलाड़ियों का गवाह रहा है, जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत से राष्ट्रीय टीम में जगह तो बनाई और डेब्यू भी किया, लेकिन चयनकर्ताओं ने उन्हें खुद को साबित करने के लिए दूसरा मौका तक नहीं दिया। आलम यह रहा कि महज एक वनडे इंटरनेशनल (ODI) मुकाबला खेलने के बाद ही इनका करियर हमेशा के लिए थम गया। आइए जानते हैं ऐसे ही 6 बदनसीब भारतीय क्रिकेटरों की दास्तान, जिनका वनडे करियर एक ही मैच की कहानी बनकर रह गया।
घरेलू सर्किट में रनों का अंबार लगाने वाले पंजाब के दिग्गज विकेटकीपर-बल्लेबाज पंकज धरमानी इस सूची में बड़ा नाम हैं। धरमानी को साल 1996 के मशहूर टाइटन कप के दौरान दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ जयपुर में वनडे डेब्यू का मौका मिला था। इस मैच में वह 8 गेंदों पर केवल 8 रन बनाकर आउट हो गए। इस एक मैच के बाद चयनकर्ताओं ने उनसे मुंह मोड़ लिया और उन्हें दोबारा कभी भारतीय वनडे जर्सी पहनने का अवसर नहीं मिला।
कर्नाटक के तेज गेंदबाज डोडा गणेश के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उन्होंने साल 1997 के जिम्बाब्वे दौरे पर अपना वनडे डेब्यू किया था। गणेश ने कसी हुई गेंदबाजी करते हुए 5 ओवर में महज 20 रन खर्च किए और दिग्गज बल्लेबाज ग्रांट फ्लावर का बेशकीमती विकेट भी चटकाया, लेकिन इस उपयोगी स्पैल के बावजूद उन्हें दोबारा किसी वनडे मैच में नहीं उतारा गया।
घरेलू क्रिकेट में 400 से ज्यादा विकेटों का पहाड़ खड़ा करने वाले राजस्थान के तेज गेंदबाज पंकज सिंह भी इंटरनेशनल स्तर पर बदकिस्मत ही रहे। साल 2010 में श्रीलंका के खिलाफ हरारे में ट्राई-नेशन सीरीज के दौरान उन्होंने अपना वनडे डेब्यू किया। इस मुकाबले में उन्होंने 7 ओवर फेंके और 47 रन दिए, लेकिन कोई विकेट उनके खाते में नहीं आया। इस बेअसर प्रदर्शन के बाद उन्हें फिर कभी 50 ओवर के फॉर्मेट में आजमाया ही नहीं गया। ठीक इसी तरह, जम्मू-कश्मीर से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दस्तक देने वाले पहले क्रिकेटर परवेज रसूल का सफर भी एक मैच तक सिमट गया।
रसूल ने साल 2014 में सुरेश रैना की कप्तानी में बांग्लादेश के खिलाफ मीरपुर में अपना वनडे पदार्पण किया था। इस मैच में रसूल ने 10 ओवर के पूरे कोटे में 60 रन देकर 2 महत्वपूर्ण विकेट चटकाए और टीम इंडिया को जीत मिली, मगर इसके बाद चयनकर्ताओं ने रसूल को दूसरा मौका देने की जहमत नहीं उठाई।
क्रिकेट प्रेमियों को यह जानकर हैरानी होगी कि टेस्ट क्रिकेट में 242 विकेट चटकाने वाले भारत के महान लेग स्पिनर भागवत चंद्रशेखर के खाते में भी महज एक ही वनडे मैच दर्ज है। साल 1976 में क्राइस्टचर्च में न्यूजीलैंड के खिलाफ चंद्रशेखर ने अपना इकलौता वनडे खेला था। उस मुकाबले में उन्होंने शानदार गेंदबाजी करते हुए 7 ओवर में सिर्फ 36 रन देकर 3 कीवी बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा था। कमाल के प्रदर्शन के बावजूद उन्हें दोबारा कभी वनडे टीम में शामिल नहीं किया गया।
वहीं विदर्भ को घरेलू क्रिकेट में चैंपियन बनाने वाले बाएं हाथ के ओपनर फैज फजल की दास्तान तो सबसे ज्यादा हैरान करने वाली है। साल 2016 में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में जिम्बाब्वे के खिलाफ उन्हें वनडे डेब्यू का मौका मिला। 124 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए फजल ने 61 गेंदों में नाबाद 55 रनों की मैच विनिंग पारी खेली और भारत 10 विकेट से मुकाबला जीत गया। डेब्यू मैच में नाबाद अर्धशतक जड़ने के बावजूद फैज फजल को दोबारा कभी भारत के लिए खेलने का मौका नहीं मिला।