हाथ छोड़ 'साइकिल' पर बैठेंगे कांग्रेसी दिग्गज, यूपी चुनाव में अखिलेश-राहुल का सबसे चौंकाने वाला प्रयोग
उत्तर प्रदेश के सियासी दंगल को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है। आगामी विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन का सीट शेयरिंग फॉर्मूला लगभग फाइनल हो चुका है। दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच पहले चरण की गंभीर चर्चा पूरी हो चुकी है और बहुत जल्द आधिकारिक सीटों का औपचारिक ऐलान कर दिया जाएगा।
इस बार गठबंधन में एक अनोखा और चौंकाने वाला चुनावी प्रयोग देखने को मिल सकता है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के कई मजबूत चेहरों को उनकी परंपरागत सीटों पर भी समाजवादी पार्टी के 'साइकिल' चुनाव चिह्न पर मैदान में उतारने की तैयारी चल रही है। साफ है कि इस गठबंधन में अखिलेश यादव की सपा 'बड़े भाई' और कांग्रेस 'छोटे भाई' की भूमिका में ही रहेगी। सीट आवंटन का मूल आधार केवल एक होगा—'जो जहां मजबूत, टिकट वहीं उसका'।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव पहले ही साफ कर चुके हैं कि उत्तर प्रदेश में गठबंधन का वही सफल मॉडल आगे बढ़ेगा जिसने लोकसभा चुनाव में नतीजे दिए। राज्य की कुल 403 विधानसभा सीटों पर होने वाले इस मुकाबले में सपा अपनी परंपरागत और मजबूत जनाधार वाली सीटों पर किसी भी सूरत में समझौता करने के मूड में नहीं है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव और 2024 के आम चुनाव में जिन क्षेत्रों में सपा का वोट बैंक अटूट रहा, वहां पार्टी ने अपने संभावित प्रत्याशियों को क्षेत्र में उतरकर जमीनी तैयारी शुरू करने का ग्रीन सिग्नल भी दे दिया है। अंतिम तालमेल को लेकर दोनों दलों के दिग्गजों की एक अहम बैठक दिल्ली में होने जा रही है।
अगर पिछले चुनावी आंकड़ों के आईने में देखें तो 2017 में जब राहुल गांधी और अखिलेश यादव 'यूपी के दो लड़के' के नारे के साथ उतरे थे, तब सपा ने 298 और कांग्रेस ने 105 सीटों पर चुनाव लड़ा था। उस मोदी लहर में सपा महज 47 और कांग्रेस 7 सीटों पर सिमट गई थी, जबकि सपा 174 और कांग्रेस 37 सीटों पर दूसरे स्थान पर रही थी। इसके बाद 2022 में कांग्रेस ने अकेले 399 सीटों पर दांव आजमाया, लेकिन उसका प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। कांग्रेस केवल दो सीटें—महाराजगंज की फरेंदा (वीरेंद्र चौधरी) और प्रतापगढ़ की रामपुर खास (आराधना मिश्रा)—ही जीत सकी, जबकि 387 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई और वोट शेयर गिरकर 2.33 प्रतिशत पर आ गया। उसी चुनाव में सपा छोटे दलों के साथ लड़कर 111 सीटों तक पहुंची थी।
सियासी समीकरण 2024 के लोकसभा चुनाव में पूरी तरह बदल गए। सपा के 2017, 2019 और 2022 के प्रयोगों के बाद 2024 में सपा-कांग्रेस की दोबारा हुई जुगलबंदी ने ऐतिहासिक वापसी कराई। प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से इस गठबंधन ने 43 सीटें जीतकर एनडीए को पछाड़ दिया, जिसमें अकेले सपा ने रिकॉर्ड 37 और कांग्रेस ने 6 सीटों पर परचम लहराया। इसी मजबूत केमिस्ट्री और मनोवैज्ञानिक बढ़त के दम पर दोनों दल अब विधानसभा के रण में सीटों का सटीक और व्यावहारिक बंटवारा कर सत्ता की राह तलाश रहे हैं।