स्टीव स्मिथ को आखिर हुआ क्या? इस गेंदबाज ने किया 'घायल', दो बार सिर की जांच कराने की आई नौबत

स्टीव स्मिथ को आखिर हुआ क्या? इस गेंदबाज ने किया 'घायल', दो बार सिर की जांच कराने की आई नौबत

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के मैदान पर अपनी गजब की एकाग्रता और अनूठे बल्लेबाजी अंदाज के लिए दुनियाभर में मशहूर ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज स्टीव स्मिथ के साथ एक डरावना हादसा होते-होते टल गया। क्रिकेट पिच पर आमतौर पर गेंदबाजों के छक्के छुड़ाने वाले स्टीव स्मिथ हाल ही में एक मुकाबले के दौरान तब बुरी तरह असहज नजर आए जब दुनिया के एक तेजतर्रार गेंदबाज की खतरनाक बाउंसर सीधी उनके हेलमेट पर जा लगी। गेंद की रफ्तार इतनी भयानक थी कि टक्कर के बाद मैदान पर कुछ पन्नों के लिए सन्नाटा पसर गया और दोनों टीमों के खिलाड़ी उनकी खैरियत जानने के लिए तुरंत उनके पास दौड़ पड़े। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए ऑस्ट्रेलियाई टीम के मेडिकल स्टाफ को मैदान के बीचों-बीच आकर दो-दो बार स्टीव स्मिथ के सिर और कॉनकॉसन (Concussion) टेस्ट की जांच करनी पड़ी। इस घटना ने एक बार फिर क्रिकेट जगत में बल्लेबाजों की सुरक्षा और खतरनाक तेज गेंदबाजी के खौफ को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है।

जब तेज गेंदबाज की रफ्तार भरी बाउंसर ने हिलाकर रख दिया

यह पूरी घटना उस वक्त घटी जब स्टीव स्मिथ अपनी टीम के लिए पिच पर डटकर पारी को आगे बढ़ा रहे थे और विपक्षी टीम के तेज गेंदबाज ने अपनी पूरी ताकत झोंकते हुए एक भयानक शॉर्ट पिच गेंद फेंकी। स्मिथ इस रफ्तार को भांपने में थोड़ी देर से चूके और गेंद सीधे उनके हेलमेट के पिछले हिस्से पर जा लगी। हेलमेट पर गेंद लगने की आवाज इतनी तेज थी कि स्टेडियम में बैठे दर्शकों की सांसें कुछ पल के लिए थम गईं। क्रिकेट के इतिहास में फिल ह्यूज और खुद स्टीव स्मिथ के साथ अतीत में हो चुकी गंभीर हेड-इंजरी की खौफनाक यादें एक बार फिर ताजा हो गईं। जब कोई बल्लेबाज गेंद लगने के बाद मैदान पर बैठ जाता है, तो हर क्रिकेट प्रेमी का दिल बैठ जाता है। स्मिथ हालांकि तुरंत अपने पैरों पर खड़े हो गए, लेकिन उनके चेहरे के हाव-भाव बता रहे थे कि झटके का असर काफी तेज था और उन्हें संभलने में वक्त लग रहा था।

दो बार मेडिकल जांच और मैदान पर डॉक्टरों की कड़ी निगरानी

नियमों के मुताबिक सिर पर गेंद लगने के तुरंत बाद कॉनकॉसन प्रोटोकॉल (Concussion Protocol) का पालन करना अनिवार्य होता है। मैदान पर तैनात फिजियोथेरेपिस्ट और मेडिकल टीम ने तुरंत दौड़कर स्टीव स्मिथ की पहली जांच की, जिसमें उनकी आंखों की पुतलियों, सजगता और संतुलन की परीक्षा ली गई। कुछ ओवर खेलने के बाद जब स्मिथ को थोड़ा असहज महसूस हुआ और उन्होंने चक्कर आने या ध्यान केंद्रित करने में परेशानी के संकेत दिए, तो अंपायर के हस्तक्षेप से खेल को दोबारा रोककर दूसरी बार उनकी गहन मेडिकल जांच कराई गई। आधुनिक क्रिकेट में खिलाड़ियों की सुरक्षा सर्वोपरि मानी जाती है और आईसीसी के कड़े नियमों के तहत किसी भी तरह के सिर के जोखिम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। गनीमत यह रही कि दोनों ही मेडिकल जांच में रिपोर्ट्स संतोषजनक आईं और किसी गंभीर आंतरिक चोट की पुष्टि नहीं हुई, जिससे ऑस्ट्रेलियाई खेमे और करोड़ों प्रशंसकों ने राहत की सांस ली।

उत्तर प्रदेश और भारत के खेलप्रेमियों में भी चिंता की लहर

क्रिकेट के खेल में जब भी किसी दिग्गज खिलाड़ी के साथ ऐसा हादसा होता है, तो उसका असर पूरी दुनिया के खेल प्रेमियों पर पड़ता है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और मेरठ जैसे क्रिकेट प्रेमी शहरों में भी जब खेल प्रेमियों ने सोशल मीडिया और समाचारों पर स्टीव स्मिथ के सिर पर गेंद लगने की यह खबर देखी, तो वे चिंतित हो उठे। भारत में भी टेस्ट और लाल गेंद के क्रिकेट में जब भारतीय बल्लेबाज बुमराह या विदेशी पिचों पर खतरनाक तेज गेंदबाजों का सामना करते हैं, तो यह बहस हमेशा छिड़ जाती है कि क्या खेल में बाउंसर्स की सीमा तय होनी चाहिए। उत्तर प्रदेश के युवा और उभरते हुए क्रिकेटर भी नेट्स पर प्रैक्टिस करते वक्त हेलमेट और सुरक्षा उपकरणों की महत्ता को भली-भांति समझते हैं। स्टीव स्मिथ के साथ घटी इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि क्रिकेट कितना जोखिम भरा खेल है जहाँ एक सेकंड की चूक किसी भी खिलाड़ी के करियर और जीवन पर भारी पड़ सकती है।

मैदान पर वापसी और खेल भावना की अद्भुत मिसाल

दो बार मेडिकल जांच से गुजरने और कुछ पल के मानसिक तनाव के बाद जब स्टीव स्मिथ ने अपनी बल्लेबाजी फिर से शुरू करने का फैसला किया, तो स्टेडियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। विपक्षी गेंदबाजों ने भी खेल भावना का परिचय देते हुए उनके सुरक्षित होने पर संतोष जताया। हालांकि इस घटना के बाद स्मिथ की बैटिंग में शुरुआती कुछ गेंदों पर थोड़ी सावधानी जरूर दिखाई दी, लेकिन जल्द ही उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज में क्रीज पर वापसी करते हुए रन बनाना जारी रखा। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि मानसिक रूप से मजबूत खिलाड़ी ही इस तरह के बाउंसर के झटके से उबरकर दोबारा टीम के लिए मैदान पर टिक सकते हैं। स्टीव स्मिथ की यह जिजीविषा और खेल के प्रति उनका समर्पण एक बार फिर यह साबित करता है कि वे आधुनिक युग के सबसे जुझारू बल्लेबाजों में से एक हैं, जो मैदान पर हर चुनौती का डटकर मुकाबला करना जानते हैं।