कौन हैं प्रज्ञान ओझा? सचिन तेंदुलकर के आखिरी टेस्ट में बने थे हीरो
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के गलियारों से इस वक्त एक बहुत बड़ी और दिलचस्प खबर सामने आ रही है, जिसने खेल प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य चयनकर्ता (Chief Selector) रहे अजीत अगरकर का कार्यकाल समाप्त होने के बाद, बोर्ड ने पूर्व दिग्गज बाएं हाथ के स्पिनर प्रज्ञान ओझा (Pragyan Ojha) को बड़ी जिम्मेदारी सौंपते हुए चयन समिति का अंतरिम प्रमुख (Interim Chief Selector) नियुक्त किया है. ओझा अब आगामी न्यूजीलैंड दौरे के लिए टीम इंडिया के चयन की प्रक्रिया और बैठकों की अगुवाई करेंगे. अपने शानदार गेंदबाजी करियर के दौरान देश के लिए कई यादगार मैच जिताने वाले प्रज्ञान ओझा का सफर हमेशा से प्रेरणादायक रहा है. आइए जानते हैं कि मैदान पर बड़े-बड़े बल्लेबाजों को अपनी फिरकी के जाल में फंसाने वाले प्रज्ञान ओझा कौन हैं और उनका क्रिकेट से लेकर चयनकर्ता तक का सफर कैसा रहा है.
प्रज्ञान ओझा का शानदार क्रिकेट करियर और उनकी फिरकी का जादू
ओडिशा के भुवनेश्वर में जन्मे और घरेलू क्रिकेट में बंगाल तथा हैदराबाद का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रज्ञान ओझा ने अपनी घातक बाएं हाथ की स्पिन गेंदबाजी से भारतीय क्रिकेट में एक अलग पहचान बनाई थी. उन्होंने टीम इंडिया के लिए तीनों फॉर्मेट में क्रिकेट खेला, जिसमें 24 टेस्ट मैचों में 113 विकेट, 18 वनडे मैचों में 21 विकेट और 6 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 10 विकेट अपने नाम किए. इसके अलावा इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में भी डेक्कन चार्जर्स और मुंबई इंडियंस जैसी टीमों की तरफ से खेलते हुए उन्होंने अपनी गेंदबाजी का लोहा मनवाया और कई खिताब जीतने में अहम भूमिका निभाई. अपनी फ्लाइट और टर्न से विपक्षी बल्लेबाजों को क्रीज पर ही उलझा देने की उनकी कला उन्हें उस दौर के सबसे प्रभावी गेंदबाजों में शुमार करती थी.
सचिन तेंदुलकर के फेयरवेल टेस्ट के बने थे हीरो, झटके थे 10 विकेट
प्रज्ञान ओझा के क्रिकेट करियर का सबसे सुनहरा और ऐतिहासिक पल नवंबर 2013 में मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में आया था, जो भारतीय क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर का आखिरी अंतरराष्ट्रीय टेस्ट मैच भी था. वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले गए उस विदाई मुकाबले में प्रज्ञान ओझा ने अपनी फिरकी का ऐसा कहर बरपाया कि मैच की दोनों पारियों में कुल मिलाकर 10 विकेट (5-5 विकेट प्रति पारी) चटका दिए. भारत ने वह मुकाबला जीतकर सचिन तेंदुलकर को एक यादगार विदाई दी थी, और इस शानदार प्रदर्शन के लिए प्रज्ञान ओझा को 'मैन ऑफ द मैच' (Player of the Match) चुना गया था. हालांकि, क्रिकेट के इस शिखर को छूने के बाद उनका अंतरराष्ट्रीय करियर ज्यादा लंबा नहीं चल सका और मात्र 27 साल की उम्र में उन्हें टीम से बाहर होना पड़ा, जिसके बाद फरवरी 2020 में उन्होंने क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से आधिकारिक संन्यास की घोषणा कर दी.
रोहित शर्मा की कप्तानी और पुरानी यादों से जुड़ा है खास नाता
प्रज्ञान ओझा का क्रिकेट का सफर और मौजूदा दौर की राजनीति का तालमेल भी काफी दिलचस्प है. ओझा उस दौर के खिलाड़ी रहे हैं जब आधुनिक भारतीय क्रिकेट के कप्तान रोहित शर्मा के साथ उन्होंने घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में लंबा वक्त बिताया है. मैदान पर अपनी सूझबूझ और शांत स्वभाव के लिए पहचाने जाने वाले ओझा ने संन्यास के बाद क्रिकेट कमेंट्री और विभिन्न मंचों पर खेल विशेषज्ञ के रूप में अपनी एक नई पहचान बनाई थी. अब जब बीसीसीआई ने उन्हें चयन समिति में अहम जिम्मेदारी सौंपी है, तो वे टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर के साथ मिलकर भारतीय क्रिकेट के भविष्य की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं.
न्यूजीलैंड दौरे के लिए टीम चयन से होगी अंतरिम पारी की शुरुआत
वर्तमान में टीम इंडिया को आगामी 22 अक्टूबर से एक लंबा और चुनौतीपूर्ण न्यूजीलैंड दौरा करना है, जिसमें टी20, वनडे और टेस्ट सीरीज के साथ-साथ 'इंडिया ए' के मुकाबले भी खेले जाने हैं. अजीत अगरकर के हटने के बाद इस महत्वपूर्ण दौरे के लिए सही और संतुलित टीम का चयन करने की पूरी जिम्मेदारी अब प्रज्ञान ओझा के कंधों पर आ गई है. गुवाहाटी में मुख्य कोच गौतम गंभीर के साथ हुई चयन समिति की अहम बैठक में ओझा ने ही पैनल की अगुवाई की है. यह देखना बेहद रोमांचक होगा कि एक पूर्व स्पिनर और समझदार खिलाड़ी के रूप में ओझा की यह चयन समिति 2027 के वनडे वर्ल्ड कप और भविष्य की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए टीम में किन नए और युवा चेहरों को मौका देती है.