Sanatana Dharm की बात करने वाले बसपाई ब्राह्मणों ने की कुछ ऐसी गलती, विप्रों में फैला आक्रोश!

ब्राह्मणों को बीएसपी से जोड़ने की मुहिम में गत सोमवार को सतीश चंद्र मिश्रा प्रयागराज गए थे। सतीश मिश्रा शाम को अरैल में गंगा आरती और पूजन में शामिल हुए। इस दौरान श्री मिश्रा से एक बड़ी चूक हो गई।

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election) से पहले सभी सियासी पार्टियां सनातन धर्म (Sanatana Dharm) की बात कर ब्राह्मणों को लुभाने में लगी हैं। बहुजन समाज पार्टी वर्ष 2007 वाले सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले पर एक बार फिर अमल कर रही है। इसके तहत बीएसपी कद्दावर ब्राह्मण नेता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा के नेतृत्व में ब्राह्मणों को जोड़ने की मुहिम चला रहे है। इस मुहिम के तहत प्रयागराज के अरैल में गंगा आरती के दौरान सतीश चंद्र मिश्रा और नकुल दुबे से कुछ ऐसी चूक हुई कि ब्राह्मण वर्ग बीएसपी से नाराज हो गया है।

उल्लेखनीय है कि ब्राह्मणों को बीएसपी से जोड़ने की मुहिम में गत सोमवार को सतीश चंद्र मिश्रा प्रयागराज गए थे। सतीश मिश्रा शाम को अरैल में गंगा आरती और पूजन में शामिल हुए। इस दौरान श्री मिश्रा से एक बड़ी चूक हो गई। वह गंगा आरती और पूजन के दौरान स्तुति वंदना के लिए खड़े होने के बजाय पार्टी नेता नकुल दूबे और राम शिरोमणि शुक्ला से बतियाते रहे। (Sanatana Dharm)

गंगा आरती और पूजन का वीडियो सामने आने के बाद ब्राह्मण वर्ग के साथ ही तीर्थ-पुरोहित भी नाराज हो गए। तीर्थपुरोहितों का कहना है कि सतीश मिश्रा ने गंगा आरती स्तुति के दौरान बैठकर सिर्फ समाज का ही नहीं बल्कि मां गंगा का भी अपमान किया है। वह ब्राह्मणों को सम्मान दिलाने के बहाने खुद का सम्मान करवाने के लिए तीर्थराज पधारे थे। (Sanatana Dharm)

अरैल घाट पर हुई इस घटना पर कांग्रेस और बीजेपी ने सतीश चंद्र मिश्रा और बीएसपी सुप्रीमो मायावती पर तीखा हमला किया है। कांग्रेस नेता संजय तिवारी ने कहा कि चुनाव के समय सतीश चंद्र मिश्रा ब्राह्मण बन जाते हैं। इस समय भी वह ब्राह्मण नेताओं से कलेक्शन के लिए निकले हैं। संजय तिवारी ने कहा कि सतीश चंद्र मिश्रा गंगा आरती स्तुति के दौरान बैठे रहकर मां गंगा के साथ ही सनातन परंपरा का भी अपमान किया है। (Sanatana Dharm)

इसी तरह बीजेपी के जिलाध्यक्ष विनय मिश्रा ने बीएसपी महासचिव पर निशाना साधते हुए कहा कि गंगा आरती और स्तुति वंदना के समय हाथ जोड़कर खड़े होने और आरती गुनगुनाने की हमारी परंपरा रही है। जिन्हे स्तुति नहीं आती, वे भी सम्मान स्वरूप हाथ जोड़कर खड़े हो जाते हैं। विनय मिश्रा ने कहा कि जो मां गंगा का सम्मान नहीं कर सकता है, वह ब्राह्मण समाज का नेतृत्व कैसे करेगा? (Sanatana Dharm)

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