Lucknow Development Authority को ठेंगा दिखाता हुआ Calcutta Regalia Lucknow, अवैध निर्माण पर जिम्मेदारों ने साधी चुप्पी ! 

Lucknow Development Authority को ठेंगा दिखाता हुआ Calcutta Regalia Lucknow, अवैध निर्माण पर जिम्मेदारों ने साधी चुप्पी ! 

योगी सरकार 2.0 में अवैध और बिना नक्शा पास कराए भवनों पर ताबड़-बतोड़ बुलडोजर चल रहे हैं। कहने को अवैध निर्माणों को लेकर सरकार का रवैया सख्त है। लेकिन हजरतगंज में एक ऐसा मामला सामने आया है जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भ्रष्टाचार के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस की नीति के साथ एक भद्दा मजाक है। अवैध रूप से निर्मित इस भवन पर एलडीए (Lucknow Development Authority) ने आंखें मूंद रखी हैं ।  जब भी ये मामला सुर्ख़ियों में आता है तो मानों एलडीए के भ्रष्ट अफसरों के यहाँ उत्सव का माहौल दिखाई जान पड़ता है। जैसे ही उक्त भवन स्वामी से एलडीए के अफसरों का सवाल जवाब शुरू होता है , भवन स्वामी एलडीए के चक्कर लगाना शुरू कर देता है। फिर ले दे कर मामला ठन्डे बास्ते में चला जाता है। बुलडोजर का भय भवन स्वामी की रातों की नींद उड़ा देता है जिसके चलते उसे जैसे तैसे एलडीए के भ्रष्ट तंत्र को संतुष्ट करना मज़बूरी बन जाती है। 

हम बात कर रहे हैं, 68-पुराना बैंक आफ बड़ौदा, गांधी आश्रम के सामने, कलकत्ता इन स्टाईल के बगल में स्थित कलकत्ता रिगेलिया (Calcutta Regalia) लखनऊ) भवन की।बिना नक्शा पास कराये अवैध निर्माण कराये जाने के चलते एलडीए द्वारा वर्ष 2014 में  इस भवन को सील कर दिया गया था। एलडीए (Lucknow Development Authority -LDA) द्वारा बिल्डिंग को सील किये जाने की जानकारी नियमानुसार हज़रतगंज पुलिस को भी दे दी गयी थी।  शोरूम के ठीक सामने पुलिस चौकी है बावजूद इसके सील होने के बाद भी मौके पर अवैध निर्माण होता रहा और अंततः नियमकानून की धज्जियाँ उड़ाते हुए एक अवैध आलीशान शोरूम शासन-प्रशासन को ठेंगा दिखाते हुए अवैध शोरूम बनकर तैयार हो गया जबकि एलडीए (Lucknow Development Authority) ने 12 अगस्त 2014 को बिना अनुमति निर्माण किए जाने पर उ प्र नगर योजना एंव विकास अधिनियम-1973 की धारा 27, 28 के तहत कार्यवाही करते हुए भवन परिसर सील कर दिया था। अब ऐसे में बड़ा सवाल ये उठता है कि जब भवन सील था तो निर्माण कब और कैसे हो गया ? इस सवाल पर एलडीए मौन साधे हुए है और गोलमोल जवाब देते हुए ये कह रहा है निर्माण काफी पहले का है लेकिन कब का है इसपर एलडीए का भ्रस्ट तंत्र रहस्यमय तरीके से मौन साधे हुए है। यूपी किरण  के पास इस मामले संबंधित सारे साक्ष्य उपलब्ध हैं जो एलडीए के पूरे खेल का पर्दाफाश करने लिए काफी है। 

आपको बता दें कि तत्कालीन मायावती सरकार में हजरतगंज को विकसित करने का फैसला किया गया था। इसके लिए हेरिटेज जोन की घोषणा हुई जिसके प्रावधानों के मुताबिक भवनों को एक ही पैटर्न के रंगों से रंगे जाने का प्रावधान था। भवनों के मूलभूत ढांचे में परिवर्तन की मनाही थी। इसके बावजूद कलकत्ता रिगेलिया भवन के जिम्मेदारों ने भवन का निर्माण कार्य शुरू करा दिया तो हजरतगंज जैसे पाश इलाके में सबकी नजर इस पर पड़ी। भवन निर्माण की शिकायत एलडीए (Lucknow Development Authority) तक पहुंची तो एलडीए ने भवन को  सील कर दिया। आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक भवन निर्माण के लिए एलडीए ने कोई नक्शा पास नहीं किया है और न ही नक्शा पास कराने के लिए कोई आवेदन दिया गया था।  

अब जब इस मामले दुबारा से मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत हुई तो जिम्मेदारों की नींद उड़नी स्वाभाविक था। एलडीए (Lucknow Development Authority) में कार्रवाई की सुगबुगाहट हुई तो अवैध निर्मित कलकत्ता रिगलिया के मालिकान ने एलडीए के चक्कर काटना शुरू कर दिया लेकिन फिर जल्दी ही एलडीए के भ्रस्ट तंत्र और शोरूम मालिकान के बीच डील फाइनल हुई और एक बार फिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भ्रष्टाचार के विरुद्ध ज़ीरो टॉलरेंस की नीति का खुलकर मजाक उड़ाया गया।  

बहरहाल एलडीए (Lucknow Development Authority) के जिम्मेदार इस प्रकरण को लेकर सन्नाटे में हैं। एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार से इस मामले में अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पायी है और न ही उनसे कोई संपर्क ही स्थापित हो पाया है।

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