दशहरे की रात कर लें ये एक चमत्कारी टोटका, शनि की साढ़ेसाती और राहु-केतु का खौफ होगा हमेशा के लिए खत्म

दशहरे की रात कर लें ये एक चमत्कारी टोटका, शनि की साढ़ेसाती और राहु-केतु का खौफ होगा हमेशा के लिए खत्म

बुराई पर अच्छाई की विजय का पावन पर्व विजयदशमी केवल अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक नहीं है, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी यह दिन ग्रहों की पीड़ा शांत करने के लिए बेहद सिद्ध माना गया है। यदि आप कुंडली में शनि की ढैय्या, साढ़ेसाती या फिर राहु और केतु के अशुभ प्रभाव से लंबे समय से मानसिक व आर्थिक परेशानियों से घिरे हैं, तो दशहरे का दिन इन संकटों से पार पाने का स्वर्णिम अवसर लेकर आता है। मान्यता है कि इस पावन तिथि पर किए गए आसान और शास्त्रसम्मत उपाय जीवन में तेजी से सकारात्मक बदलाव लाते हैं और अटके हुए कार्यों को गति देते हैं।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, दशहरे की शाम शमी वृक्ष के पूजन का विशेष महात्म्य है। सूर्यास्त के समय शमी के पेड़ की विधिवत पूजा-अर्चना करें और वृक्ष की जड़ के पास शुद्ध घी या सरसों के तेल का दीपक अवश्य प्रज्वलित करें। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शमी के पौधे में शनिदेव का वास माना जाता है और दशहरे के दिन इसका पूजन करने से शनि के साथ-साथ राहु और केतु की मारक दृष्टि भी शांत हो जाती है, जिससे जीवन के भारी अवरोध दूर होते हैं।

जरुर करें ये असरदार उपाय 

इसके साथ ही शनि दोष और पापी ग्रहों की शांति के लिए हनुमान जी की कृपा पाने का एक बेहद असरदार उपाय भी किया जाता है। दशहरे के दिन 3, 5 या 7 साबुत पत्ते लेकर उन पर लाल सिंदूर से श्रद्धापूर्वक 'जय श्री राम' लिखें। इसके बाद पास के किसी हनुमान मंदिर में जाकर इन पत्तों को अर्पित कर दें। इस दौरान केवल एक बात का खास ख्याल रखना चाहिए कि इन पत्तों को भूलकर भी पवनपुत्र के चरणों में न रखें, बल्कि उनके सामने या मंदिर की वेदी पर आदरपूर्वक स्थापित करें। इस उपाय से शनि देव का भय दूर होता है और राहु-केतु के नकारात्मक प्रभाव धीरे-धीरे बेअसर हो जाते हैं।

तीसरा चमत्कारी उपाय रावण दहन की परंपरा से जुड़ा है। रावण दहन के उपरांत थोड़ी सी पवित्र राख लेकर उसे एक साफ लाल कपड़े की पोटली में सुरक्षित बांध लें। इस पोटली को अपने घर की पूर्व दिशा में किसी शुद्ध स्थान पर स्थापित कर दें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से कुंडली में मौजूद कालसर्प दोष की तीव्रता घटती है और घर-परिवार में आ रही अड़चनों से मुक्ति मिलती है। साथ ही शनि, राहु और केतु के अशुभ गोचर से जूझ रहे जातकों को मानसिक शांति और आर्थिक सुरक्षा का अनुभव होता है।