100 का ऑनलाइन ट्रांसफर और फिर कनपटी पर गोली! दोस्त की पत्नी पर फिदा आशिक ने रची रूह कंपा देने वाली साजिश
उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सोनिया विहार क्षेत्र में बीते 13 अक्टूबर की रात हुए 34 वर्षीय मनीष यादव हत्याकांड का पर्दाफाश करते हुए दिल्ली पुलिस ने खौफनाक साजिश की परतें खोल दी हैं। पुलिस ने मामले में मुख्य साजिशकर्ता समेत पांच आरोपियों को अरेस्ट किया है, जबकि वारदात में शामिल दो नाबालिगों को हिरासत में लिया गया है।
तफ्तीश में सामने आया कि पूरी साजिश एक तरफा इश्क और शादी की सनक में रची गई थी। मुख्य आरोपी मनीष की पत्नी से शादी करने का सपना देख रहा था और उसी रास्ते का कांटा हटाने के लिए उसने दो नाबालिग लड़कों को दो लाख रुपये की सुपारी देकर इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिलवाया।
मुख्य आरोपी की हो चुकी है पहचान
पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी की पहचान उमेश मौर्य के रूप में हुई है, जो मनीष और उसके परिवार को पहले से भली-भांति जानता था। उमेश की खुद की वैवाहिक जिंदगी में कलह चल रही थी और अदालत में तलाक का केस लंबित था। इसी दौरान वह मनीष की पत्नी की तरफ आकर्षित हुआ और उससे शादी करने के इरादे से मनीष की हत्या की योजना बनाने लगा।
इस खूनी साजिश को अमलीजामा पहनाने के लिए उसने अपने साथी विवेक सिंह के साथ मिलकर दो नाबालिगों को हायर किया। इसके अलावा आनंद, नितिन उर्फ नरेंद्र और हथियार मुहैया कराने वाले भीम सिंह को भी इस नेटवर्क में शामिल किया गया।
हत्या की पहली कोशिश 10 अक्टूबर को की गई थी, जब उमेश मनीष को रोहिणी से सोनिया विहार लाने पहुंचा था और शूटर 4.5 पुश्ता पर घात लगाए बैठे थे, मगर मनीष के घर न लौटने पर वह प्लान फेल हो गया। इसके बाद 13 अक्टूबर की शाम मनीष जब अपनी बहन की परीक्षा दिलवाकर नोएडा से लौटा, तो उमेश ने बेहद शातिराना चाल चली। उसने पुराने एक हजार रुपये के लेन-देन का बहाना बनाकर मनीष को यूपीआई के जरिए सिर्फ 100 रुपये ट्रांसफर किए और बाकी नकद रकम लौटाने के लिए उसे घर से बाहर 4.5 पुश्ता के पास बुलाया।
जैसे ही मनीष वहां पहुंचा, पहले से इशारा पाकर मोटरसाइकिल सवार दोनों नाबालिगों ने बेहद करीब से उसकी कनपटी पर गोली दाग दी। लहूलुहान हालत में मनीष को सुश्रुत ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
वारदात के बाद उमेश ने खुद को बेकसूर दिखाने के लिए मनीष को उठाने में मदद का नाटक भी किया। हालांकि, घटनास्थल पर मौजूद चश्मदीद बने उसके साथी विवेक सिंह के बयानों में आए विरोधाभास ने पुलिस का शक गहरा दिया। पुलिस ने जब इलाके के दर्जनों सीसीटीवी फुटेज खंगाले, कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) का विश्लेषण किया और बैंक खातों के यूपीआई ट्रांजैक्शन ट्रैक किए, तो पूरी साजिश बेनकाब हो गई। पुलिस ने आरोपियों के पास से कत्ल में इस्तेमाल एक सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल, दो जिंदा कारतूस और वारदात में प्रयुक्त मोटरसाइकिल बरामद कर ली है।
पुलिस जांच में पकड़े गए आरोपियों की विचित्र पृष्ठभूमि भी सामने आई है। साजिश में शामिल विवेक सिंह कानून की डिग्री धारक है, जो खुद को वकील बताता है और साथ ही झाड़-फूंक व धार्मिक अनुष्ठान कराने का काम करता है। मुख्य आरोपी उमेश मौर्य लगेज डिपार्टमेंट में सुपरवाइजर है और पूर्व में पिज्जा डिलीवरी बॉय रह चुका है। वहीं आनंद फूड डिलीवरी का काम करता था, नितिन शिक्षा विभाग में संविदा पर डेटा एंट्री ऑपरेटर है और भीम सिंह जिम में सफाईकर्मी है। भीम सिंह ने ही अपने दिवंगत भाई की पुरानी पिस्तौल विवेक को बेची थी। फिलहाल पुलिस सभी आरोपियों को रिमांड पर लेकर मामले से जुड़े अन्य तकनीकी साक्ष्यों को मजबूत करने में जुटी है।