Uttar Pradesh News: नौ पेज के इस लेटर ने खोल दी कोषागार में चल रहे रैकेट की पोल!
(पवन सिंह)
"कोषागार" को किस तरह से एक गिरोह ने अपना "निजी कारागार" बना रखा है, इसे शासन को लिखे एक पत्र ने खोलकर रख दिया..!! इस पत्र की एक प्रति मेरे हाथ लगी तो पता चला कि कोषागार की अपनी एक निजी चारदीवारी है, जैसे कारागार की होती है..!!! "अंदर से कोई बाहर न जा सके...बाहर से कोई अंदर न आ सके...बोलो अगर ऐसा हो तो क्या हो...!!" फिल्म बाबी का यह गाना आजकल इसी कोषागार में धड़ल्ले से गाया-बजाया जा रहा है...एक सुनियोजित गिरोह यहां अपना कब्जा जमा चुका है..!!
उत्तर प्रदेश सहायक कोषाधिकारी संवर्ग की पदोन्नति समिति की बैठक दिनांक 5 अक्टूबर 2026 को अपर मुख्य सचिव वित्त की अध्यक्षता में आहूत थी परंतु अचानक दिनांक 1 अक्टूबर 2026 को विट विभाग द्वारा उक्त बैठक को अपरिहार्य कारणों से निरस्त कर दिया गया पता करने पर ज्ञात हुआ कि बी केतिवारी प्रान्तीय सदस्य, सेवा भारती कानपुर प्रांत ने एक शिकायत पत्र अपर मुख्य सचिव विथ को उनके ह्वाट्सऐप पर भेजा जिसमें मुख्य यह उल्लेख किया गया की जब लेखाकारों की अंतिम ज्येष्ठता सूची नौ जनवरी 26 को जारी की जा चुकी है तो उसमें कोई भी परिवर्तन का आधार किसी स्तर पर नहीं रह जाता है परंतु निदेशक कोषागार ने मन चाहा रवैया अपनाते हुए अंतिम ज्येष्ठता सूची में फेरबदल करके पात्रता सूची वित् विभाग को भेज दी जो की पूर्ण तया पक्ष पात पूर्ण एवं ग़लत है साथ ही लिपिक वर्ग के पाँच पदों के सापेक्ष छह पदों को किन कारणों से दर्शाया गया स्पष्ट नहीं है। नियमत: पद बढ़ाने या घटने के कार्य वित्त/कार्मिक विभाग धारा किया जाता है परंतु निदेशक ने अपनी हठधर्मिता के कारण बिना किसी नियम के पदों में परिवर्तन कर दिया।
पूरी स्थिति ज्ञात करने पर यह संज्ञान में आया कि निदेशक कोषागार जैसे महत्वपूर्ण पद पर कई योग्य/वरिष्ठ अधिकारियों के होने के बाद भी विजय कुमार सिंह, विशेष सचिव वित्त को निदे कोषागार का कार्य अतिरिक्त रूप से दिया गया है। जब की पूर्व में जो वित्त एवं लेखा सेवा की वरिष्ठ अधिकारी होता उसे ही यथा संभव निदेशक कोषागार बनाया जाता था।

सिंह निदेशालय कोषागार में पूर्ण समय नहीं दे पाते हैं जिस कारण ऐ ग़लतियाँ होना स्वाभाविक है। यह भी ज्ञात हुआ की सिंह द्वारा गत वर्ष एवं इस वर्ष तमाम कोषागारों के कार्मिकों का स्थानांतरण शासन द्वार जारी स्थानांतर नीति के विरुद्ध किए गए और बाद में उन्हें उसी कोषागार/निकट के कोषागार में सम्बद्ध किया गया, जो साफ़ साफ़ बयान करता है की सिंह किस प्रवत्ति के अधिकारी है। इनकी कई शिकायते शासन के वित्त विभाग में लंबित हैं परंतु वित्त विभाग में ही विशेष सचिव होने के कारण किसी भी शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं होती या दबा दी जाति है।
सख़्त प्रशासन, जीरो टार्लेंस, न भ्रष्टाचार न गुंडाराज अबकी बार भाजपा सरकार ...का नारा "जवाहर भवन" के नवम तल की सीढ़ियां चढ़ते-चढ़ते चिरक देता है...!!!
यह नमूना अन्य विभागों में भी होगा इस से इंकार नहीं किया जा सकता।
