आजादी के 80 साल बाद भी नहीं बनी सड़क! उत्तराखंड के इस गांव ने नेताओं को दी खुली चुनौती—'पैर भी मत रखना!'
उत्तराखंड के टिहरी-गढ़वाल क्षेत्र अंतर्गत कीर्तिनगर ब्लॉक के गवाणा गांव में आजादी के लगभग आठ दशक बीत जाने के बाद भी पक्की सड़क न पहुंचने से ग्रामीणों का गुस्सा अब आंदोलन का रूप ले चुका है। बुधवार को गांव और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में जुटे ग्रामीणों ने सड़क की मांग को लेकर प्रशासन के खिलाफ हुंकार भरी। ग्रामीणों ने ढूंढप्रयाग चौराहे से लेकर कीर्तिनगर एसडीएम कार्यालय तक जोरदार विरोध जुलूस निकाला और वन विभाग तथा स्थानीय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। एसडीएम दफ्तर पहुंचकर ग्रामीणों ने सांकेतिक धरना दिया और दो टूक चेतावनी दी कि यदि जल्द ही सड़क की औपचारिक वित्तीय व प्रशासनिक स्वीकृति जारी नहीं हुई, तो वे 2027 के विधानसभा चुनाव का पूरी तरह बहिष्कार करेंगे।
प्रदर्शनकारियों का सीधा आरोप है कि वन विभाग की तकनीकी और कागजी अड़चनों के चलते गवाणा गांव तक पहुंचने वाली प्रस्तावित सड़क का निर्माण वर्षों से फाइलों में दबा पड़ा है। विभागीय खींचतान और अधिकारियों की बेरुखी का खामियाजा गांव के बुजुर्गों, महिलाओं और स्कूली बच्चों को रोजाना पथरीली और दुर्गम पगडंडियों पर जान जोखिम में डालकर भुगतना पड़ रहा है। आपातकालीन स्थिति में बीमार मरीजों या गर्भवती महिलाओं को डंडी-कंडी के सहारे मुख्य मार्ग तक ले जाना ग्रामीणों की रोजमर्रा की मजबूरी बन चुका है।
संघर्ष समिति के अध्यक्ष केदार सिंह नेगी समेत प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों ने कहा कि आज के आधुनिक दौर में सड़क कोई विलासिता नहीं बल्कि जीवन की सबसे बुनियादी जरूरत है। बिना सड़क संपर्क के गांव में न तो बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच पा रही हैं और न ही बच्चों की उच्च शिक्षा सुरक्षित रह पा रही है। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि 'रोड नहीं तो वोट नहीं' का नारा अब सिर्फ बात नहीं है, बल्कि पूरा गांव इस बार अपने फैसले पर अडिग रहेगा। यदि 2027 चुनाव से पहले जमीन पर सड़क निर्माण का काम शुरू नहीं हुआ तो किसी भी राजनीतिक दल के नेता को गांव में घुसने नहीं दिया जाएगा।
धरने के बाद ग्रामीणों के एक प्रतिनिधिमंडल ने उपजिलाधिकारी (एसडीएम) कीर्तिनगर को अपनी मांगों का विस्तृत ज्ञापन सौंपा और वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी करवाकर सड़क निर्माण कार्य अविलंब शुरू कराने की मांग की। इस विरोध प्रदर्शन में अरुण नेगी, सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप गोदियाल, गौरव राणा, ग्राम प्रधान सुरेश चौहान सहित गवाणा व आसपास की ग्राम पंचायतों के कई प्रबुद्ध नागरिक और स्थानीय युवा प्रमुख रूप से मौजूद रहे।