पैदल चलना मुश्किल हो गया है... देहरादून पलटन बाजार में नो-एंट्री के बावजूद दौड़ रहीं गाड़ियां, खरीदार परेशान
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के सबसे प्रमुख, ऐतिहासिक और भीड़भाड़ वाले मुख्य व्यापारिक केंद्र पलटन बाजार में इन दिनों खरीदारी के लिए आने वाले स्थानीय निवासियों और दूर-दराज से पहुंचे पर्यटकों को भारी दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। कहने को तो स्मार्ट सिटी परियोजना और स्थानीय जिला प्रशासन के सख्त निर्देशों के तहत पलटन बाजार को पूरी तरह से 'व्हीकल फ्री जोन' यानी नो-एंट्री एरिया घोषित किया गया है, लेकिन धरातल पर हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है। बाजार के प्रवेश द्वारों पर पुलिस बैरियर और सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के बावजूद दोपहिया वाहन, ई-रिक्शा और माल ढोने वाले व्यावसायिक वाहन बेधड़क भीड़भाड़ वाली संकरी गलियों में फर्राटा भर रहे हैं। त्यौहारों के इस सीजन में जब बाजार में पैर रखने तक की जगह नहीं है, ऐसे में अनियंत्रित तरीके से दौड़ती गाड़ियों के कारण पैदल चलने वाले खरीदारों और खासकर महिलाओं, बुजुर्गों व छोटे बच्चों के लिए पैदल चलना तक किसी दुस्वप्न से कम साबित नहीं हो रहा है।
घंटाघर से लेकर कोतवाली तक जाम का जंजाल और अनियंत्रित वाहनों का बेरोकटोक प्रवेश
देहरादून के दिल कहे जाने वाले ऐतिहासिक घंटाघर से शुरू होकर धामावाला और कोतवाली तक फैलने वाले इस विशाल मुख्य बाजार में सुबह से लेकर देर रात तक खरीदारों का भारी हुजूम उमड़ता है। कहने के लिए पुलिस प्रशासन ने बाजार की मुख्य सड़कों पर चार पहिया और दोपहिया वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है, लेकिन पुलिस चौकियों की ढिलाई और स्थानीय दुकानदारों व ई-रिक्शा चालकों की मनमानी के चलते नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बाजार की तंग गलियों में जब रफ्तार से बाइकें और सामान से लदे तीन पहिया वाहन गुजरते हैं, तो हर पल दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है। कई बार वाहन चालकों और पैदल चल रहे ग्राहकों के बीच तीखी बहस और कहासुनी की नौबत आ जाती है। स्थानीय ग्राहकों का कहना है कि प्रशासन द्वारा बनाए गए सभी नियम सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गए हैं और जमीनी स्तर पर कोई भी पुलिसकर्मी या ट्रैफिक होमगार्ड नियमों का कड़ाई से पालन कराने के लिए मुस्तैद दिखाई नहीं देता।
व्यापारियों का स्थाई अतिक्रमण और स्मार्ट सिटी के दावों की खुली पोल
पलटन बाजार में केवल वाहनों की बेरोकटोक आवाजाही ही समस्या की एकमात्र वजह नहीं है, बल्कि बाजार के दोनों ओर दुकानदारों द्वारा किया गया अवैध और स्थाई अतिक्रमण इस विकट स्थिति को और अधिक भयंकर बना देता है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत लाखों-करोड़ों रुपये खर्च करके पलटन बाजार के पैदल रास्तों (फुटपाथ) को चौड़ा और सुगम बनाने का दावा किया गया था, लेकिन आज उन फुटपाथों पर दुकानदारों ने अपने डिस्प्ले काउंटर, कपड़े के पुतले और सामान के बड़े-बड़े बक्से सजा रखे हैं। बचा-कुचा रास्ता बीच सड़क पर खड़े ठेले-फड़ वाले और बेतरतीब पार्क किए गए दोपहिया वाहन छेक लेते हैं। स्थिति यह हो चुकी है कि 30 फीट चौड़ी सड़क सिमटकर महज 4 से 5 फीट की रह गई है। इस भीषण अतिक्रमण और अनियंत्रित गाड़ियों के कारण यदि बाजार में कोई आपातकालीन स्थिति पैदा हो जाए या आग लग जाए, तो दमकल विभाग की गाड़ी या एम्बुलेंस का अंदर पहुंचना पूरी तरह से नामुमकिन है, जो किसी भी दिन बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
खरीदारों और स्थानीय निवासियों का फूटा गुस्सा, जिला प्रशासन और पुलिस से की सख्त कार्रवाई की मांग
बाजार की इस बदहाली और प्रशासनिक अनदेखी को लेकर देहरादून के स्थानीय नागरिकों, महिला खरीदारों और व्यापार मंडल के एक बड़े धड़े में भारी रोष व्याप्त है। खरीदारी करने पहुंचीं स्थानीय महिलाओं का कहना है कि बच्चों और बुजुर्गों को साथ लेकर पलटन बाजार आना अब जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है। जगह-जगह गाड़ियों के हॉर्न का शोर, प्रदूषण और धक्का-मुक्की ने खरीदारी के पूरे अनुभव को बिगाड़ कर रख दिया है। जनता ने देहरादून के जिलाधिकारी (DM) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) से गुहार लगाई है कि पलटन बाजार के सभी प्रवेश द्वारों पर लोहे के पक्के बोलार्ड (बैरियर) लगाए जाएं ताकि कोई भी दोपहिया वाहन अंदर प्रवेश न कर सके। इसके साथ ही नो-एंट्री के नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों पर भारी चालानी कार्रवाई करने और बाजार को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए विशेष पुलिस दस्ते की तैनाती की मांग उठाई गई है ताकि दूनवासी सुकून और सुरक्षा के साथ अपनी खरीदारी कर सकें।
निष्कर्ष: पलटन बाजार की साख और जनता की सुरक्षा के लिए कड़े प्रशासनिक कदम उठाना जरूरी
संक्षेप में कहें तो देहरादून का पलटन बाजार केवल एक खरीद-फरोख्त का केंद्र नहीं है, बल्कि यह दून घाटी की ऐतिहासिक पहचान और पर्यटन का मुख्य आधार है। नो-एंट्री नियमों की धज्जियां उड़ने और बेकाबू गाड़ियों की आवाजाही से न केवल आम जनता की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है, बल्कि स्मार्ट सिटी के दावों पर भी गंभीर सवालिया निशान लग रहे हैं। यदि समय रहते पुलिस प्रशासन और नगर निगम ने मिलकर पलटन बाजार को पूरी तरह से वाहन मुक्त और अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए कड़े कदम नहीं उठाए, तो राजधानी का यह प्रमुख व्यापारिक केंद्र अपनी चमक और खरीदारों का भरोसा पूरी तरह खो देगा।