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Up Kiran, Digital Desk: भारतीय रेलवे आज दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। रोज लाखों लोग इसमें सफर करते हैं। वंदे भारत हो या बुलेट ट्रेन का सपना हर तरफ आधुनिक ट्रेनों की बात हो रही है। मगर क्या आप जानते हैं कि इन तेज रफ्तार ट्रेनों को चलाने वाले पहिये कहाँ बनते हैं?

ज्यादातर लोग सोचते हैं कि ट्रेन के पहिये बाहर से आते होंगे। लेकिन सच कुछ और है। भारत अब खुद के पहिये बना रहा है और बहुत जल्द निर्यातक भी बनने वाला है।

सिर्फ दो बड़े प्लांट संभालते हैं पूरा भार

भारत में ट्रेन के पहिये मुख्य रूप से दो जगह तैयार होते हैं। पहला नाम है बेंगलुरु का रेल पहिया फैक्ट्री यानी RWF। ये देश का सबसे पुराना और एकीकृत कारखाना है। यहाँ पहिया धुरी और पूरा व्हील सेट बनता है। दूसरा बड़ा प्लांट बिहार के सारण जिले में बेला में स्थित है। इसे रेल व्हील प्लांट कहते हैं। ये दोनों मिलकर भारतीय रेलवे की सारी जरूरत पूरी करते हैं।

अब तमिलनाडु और यूपी में भी लग रहे नए संयंत्र

खबर यह भी है कि तमिलनाडु के गुम्मिडीपोंडी में फोर्ज्ड पहियों का नया प्लांट शुरू होने वाला है। इसी तरह उत्तर प्रदेश के रायबरेली में निजी और सरकारी क्षेत्र मिलकर हाई-स्पीड ट्रेनों के लिए खास पहिये बना रहे हैं। इन नए प्लांट्स की वजह से अब वंदे भारत अमृत भारत जैसी ट्रेनों के पहिये भी देश में ही बन रहे हैं। आयात बिल्कुल कम हो गया है।

एक पहिये का वजन सुनकर दंग रह जाएंगे

सामान्य यात्री डिब्बे का पहिया करीब 384 किलो का होता है। LHB कोच में 326 किलो तक हल्के पहिये लगते हैं। लेकिन इलेक्ट्रिक इंजन का पहिया 554 किलो तक भारी होता है। डीजल इंजन के पहिये भी 528 किलो के आसपास रहते हैं। वजह साफ है इंजन को पूरी ट्रेन खींचनी होती है इसलिए पहिये ज्यादा मजबूत और भारी बनाए जाते हैं।