सुलगते फ्रांस के बीच मैक्रॉन का कड़ा रुख: दंगाइयों की जेब से होगी नुकसान की भरपाई, जनता को राहत का वादा
फ्रांस की मुख्य भूमि से लेकर उसके सुदूर समुद्री क्षेत्रों तक फैली हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी के बाद राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने कड़ा रुख अपनाते हुए कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वालों को दो टूक चेतावनी दी है। देश को संबोधित करते हुए उन्होंने साफ कहा कि वास्तविक आर्थिक परेशानियों के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने वाले नागरिकों और सड़कों पर तबाही मचाने वाले उपद्रवियों में बुनियादी फर्क है, जिसे सरकार नजरअंदाज नहीं करेगी। अब तक करीब 1,800 दंगाइयों को हिरासत में लिया जा चुका है और न्याय मंत्रालय को निर्देश दिए गए हैं कि लोक अभियोजक हर मामले में बिना किसी ढिलाई के सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करें। मैक्रॉन ने दो टूक स्पष्ट किया कि सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को तबाह करने और दुकानों को लूटने वालों से ही पूरे नुकसान की पाई-पाई वसूली जाएगी।
राष्ट्रपति ने इस अराजकता पर देश के आक्रोश और शर्म को साझा करते हुए लिमोज टाउन हॉल में आग लगाने, ल्योन में पर्यटक कार्यालय को फूंकने, मार्सिले टाउन हॉल पर हमले और बोर्डो में प्रीफेक्ट के सरकारी आवास को निशाना बनाने जैसी अति-वामपंथी व अराजक तत्वों की बेलगाम हिंसा की तीखी भर्त्सना की। उन्होंने कहा कि ऐसे हिंसक कृत्यों को किसी भी हाल में सही नहीं ठहराया जा सकता और न ही इसे माफ किया जाएगा। इसके साथ ही गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज और सुरक्षा एजेंसियों को उन खुफिया चूकों की गहराई से पड़ताल करने को कहा गया है, जिनकी वजह से उपद्रवी इस कदर बेखौफ होकर घटनाओं को अंजाम दे पाए।
जनता के गुस्से की मूल वजह महंगाई और ईंधन की आसमान छूती कीमतों पर बात करते हुए मैक्रॉन ने माना कि फारस की खाड़ी के तनाव का असर सीधे तौर पर देश की ऊर्जा लागत पर पड़ रहा है। इस संकट से पार पाने के लिए वे स्वयं खाड़ी देशों का दौरा करेंगे ताकि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों का दबाव कम किया जा सके। इसके अलावा प्रधानमंत्री और सरकार ने घरेलू स्तर पर ईंधन वितरकों से सीधा तालमेल बैठाया है, जिससे राहत का फायदा सीधे आम उपभोक्ताओं तक पहुंच सके।
युवाओं और छात्रों के भविष्य को लेकर उन्होंने व्यवस्थित संवाद का रोडमैप सामने रखा, जिसके तहत शिक्षा मंत्रालय के जरिए पहले ही एक लाख से अधिक सुझाव आ चुके हैं। हिंसा की चपेट में आए व्यापारियों को तुरंत उबारने के लिए प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू की अध्यक्षता में एक विशेष संकटकालीन इकाई बनाई गई है, जो सीधे आर्थिक मदद मुहैया कराएगी। राष्ट्रपति चुनाव से छह महीने पहले उपजे इस तनाव पर उन्होंने सभी राजनीतिक दलों, यूनियनों और संगठनों से जिम्मेदार भूमिका निभाने की अपील करते हुए लोकतांत्रिक संस्थाओं को बंधक बनाने की कोशिशों के खिलाफ सख्त चेतावनी दी।