3600 मीटर की ऊंचाई पर कुदरत का कहर, नेपाल के डोल्पा में फंसे 6 भारतीय

3600 मीटर की ऊंचाई पर कुदरत का कहर, नेपाल के डोल्पा में फंसे 6 भारतीय

हिमालय की गोद में बसे नेपाल के सुदूर और दुर्गम पर्वतीय जिले डोल्पा में प्राकृतिक आपदा और अचानक बिगड़े मौसम ने ऐसा भयावह रूप धारण किया है कि वहां का नजारा देखकर रोंगटे खड़े हो जाएं। समुद्र तल से लगभग 3600 मीटर की जानलेवा ऊंचाई पर स्थित इस बेहद ठंडे और पथरीले इलाके में भारत के 6 नागरिक कुदरत के भीषण कहर के बीच फंस गए हैं। अचानक हुई भारी बर्फबारी, शून्य से नीचे गिरते तापमान और बर्फीले तूफान (Blizzard) के कारण इन भारतीय पर्यटकों का संपर्क पूरी दुनिया से लगभग कट चुका है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और ऑक्सीजन की भारी कमी के चलते फँसे हुए लोगों की जान पर बन आई है। इस दिल दहला देने वाले घटनाक्रम की सूचना सामने आते ही नेपाल प्रशासन, काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास और स्थानीय आपातकालीन राहत एजेंसियों के बीच हड़कंप मच गया है, जिसके बाद उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए एक बेहद कठिन और जोखिम भरा रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया है।

डोल्पा जिला नेपाल का एक ऐसा इलाका है जहां आम दिनों में भी पहुंचना किसी दुःसाहस से कम नहीं माना जाता। अपनी अलौकिक प्राकृतिक सुंदरता, प्राचीन बौद्ध मठों और प्रसिद्ध शे फोक्सुंडो राष्ट्रीय उद्यान के लिए जाने जाने वाला यह क्षेत्र साहसिक ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए आकर्षण का केंद्र रहता है। लेकिन जब हिमालय की इन चोटियों पर मौसम अपनी करवट बदलता है, तो यह खुशनुमा सफर कुछ ही मिनटों में मौत के जाल में बदल जाता है। फंसे हुए भारतीय पर्यटकों का यह दल भी ट्रेकिंग और प्राकृतिक नजारों के दीदार के लिए ही डोल्पा की ऊपरी वादियों में पहुंचा था। लेकिन उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि 3600 मीटर की ऊंचाई पर बर्फीला तूफान उनके रास्तों को पूरी तरह से निगल लेगा और वे एक ऐसी जगह कैद होकर रह जाएंगे जहां जिंदगी और मौत के बीच का अंतर बहुत कम रह जाता है।

अचानक बदले मौसम ने रोकी सांसें, बर्फीले तूफान और -15 डिग्री तापमान में कटे दिन-रात

स्थानीय गिल्ड और पर्वतारोहण विभाग से मिली प्राथमिक जानकारियों के मुताबिक, भारतीय दल जब अपनी ट्रेकिंग के अग्रिम पड़ाव पर था, तभी अचानक आसमान को घने और काले बादलों ने घेर लिया। देखते ही देखते इलाके में तेज गति से चलने वाली बर्फीली हवाएं शुरू हो गईं और दृश्यता (Visibility) घटकर शून्य के करीब पहुंच गई। भारी बर्फबारी के कारण ट्रेकिंग का मुख्य मार्ग पूरी तरह से धंस गया और बड़े-बड़े बर्फ के टीले (Avalanche Risks) सड़कों और पैदल रास्तों पर जमा हो गए। दिशा का अंदाजा न मिलने और रास्तों के पूरी तरह बंद हो जाने के कारण सभी 6 भारतीय नागरिक वहीं पर फंसकर रह गए।

3600 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर रात का तापमान माइनस 15 से 20 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है। इतने कम तापमान में बिना पर्याप्त हीटिंग उपकरण और सीमित राशन-पानी के साथ खुले या कामचलाऊ टेंटों में रहना किसी बुरे सपने से कम नहीं है। अत्यधिक ठंड के कारण हाइपोथर्मिया (Hypothermia) और हाई एल्टीट्यूड सिकनेस (Acute Mountain Sickness) जैसी गंभीर चिकित्सा स्थितियों का खतरा बहुत तेजी से बढ़ जाता है, जहां शरीर के अंग धीरे-धीरे काम करना बंद कर देते हैं। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि फंसे हुए भारतीयों के पास मौजूद खाने-पीने की वस्तुएं और बैटरी से चलने वाले संचार उपकरण भी अब धीरे-धीरे खत्म होने के कगार पर हैं, जिससे उनकी स्थिति पल-पल और अधिक नाजुक होती जा रही है।

भारतीय दूतावास हरकत में, नेपाल सेना और हेलिकॉप्टर रेस्क्यू टीम ने संभाला मोर्चा

घटना की गंभीरता और इंसानी जिंदगी पर बने इस भारी संकट को देखते हुए काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने तुरंत नेपाली अधिकारियों और विदेश मंत्रालय के साथ उच्चस्तरीय संपर्क स्थापित किया है। भारतीय अधिकारियों ने नेपाल सरकार से फंसे हुए नागरिकों को बिना किसी देरी के सुरक्षित निकालने के लिए नेपाली सेना (Nepal Army) के विशेष पर्वतीय राहत दस्ते और अत्याधुनिक रेस्क्यू हेलिकॉप्टरों को काम पर लगाने का विशेष अनुरोध किया है। दूतावास की एक समर्पित टीम लगातार नेपाल के स्थानीय जिला प्रशासन और पुलिस प्रमुख के संपर्क में बनी हुई है ताकि रेस्क्यू ऑपरेशन की हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके।

हालांकि, इस रेस्क्यू ऑपरेशन में सबसे बड़ा रोड़ा वहां का बेहद खराब और उग्र मौसम बना हुआ है। 3600 मीटर की ऊंचाई पर तेज हवाओं और लगातार हो रही बर्फबारी के कारण रेस्क्यू हेलिकॉप्टरों को उड़ान भरने और लैंडिंग करने में भारी जोखिम का सामना करना पड़ रहा है। नेपाली सेना के विशेषज्ञ पायलट मौसम के थोड़ा सा भी साफ होने का इंतजार कर रहे हैं ताकि तुरंत उड़ान भरकर फंसे हुए भारतीयों तक पहुंचा जा सके और उन्हें एयरलिफ्ट करके निचले और सुरक्षित इलाके के अस्पतालों में भर्ती कराया जा सके। वहीं दूसरी ओर, पैदल रेस्क्यू करने वाली नेपाली सेना और स्थानीय शेर्पाओं की एक साहसी टीम भी जान जोखिम में डालकर बर्फ काटते हुए आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है।

परिजनों में छाई गहरी चिंता, देश भर में की जा रही है सलामती की दुआएं

इस दुखद और डरावनी खबर के भारत पहुंचते ही फंसे हुए पर्यटकों के परिजनों के बीच कोहराम मच गया है। अपनों से संपर्क न हो पाने और सोशल मीडिया व समाचारों पर लगातार आ रही गंभीर खबरों के कारण परिजन गहरे सदमे में हैं और सरकार से अपने बच्चों व आत्मीयों को सकुशल वापस लाने की गुहार लगा रहे हैं। भारत के विदेश मंत्रालय ने आश्वासन दिया है कि नेपाली अधिकारियों के साथ मिलकर हर संभव मदद मुहैया कराई जा रही है और देशवासियों को सुरक्षित बाहर निकालना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

हिमालयी क्षेत्रों में इस प्रकार की आकस्मिक प्राकृतिक आपदाएं यह चेतावनी भी देती हैं कि उच्च पर्वतीय इलाकों में यात्रा करते समय मौसम के पूर्वानुमान और स्थानीय चेतावनियों को नजरअंदाज करना कितना भारी पड़ सकता है। फिलहाल पूरे देश की निगाहें और प्रार्थनाएं नेपाल के डोल्पा जिले की उन बर्फीली वादियों पर टिकी हुई हैं, जहां जिंदगी और मौत के बीच यह भयंकर संघर्ष जारी है। हर कोई यही उम्मीद कर रहा है कि रेस्क्यू टीम जल्द से जल्द उन 6 भारतीयों तक पहुंचेगी और कुदरत के इस कहर के बीच फंसी 6 जिंदगियों को एक नया जीवनदान मिलेगा।