
Up Kiran, Digital Desk: गणेश चतुर्थी का त्योहार हमारे देश के सबसे ख़ूबसूरत त्योहारों में से एक है. ढोल-नगाड़े, भजन-कीर्तन और मोदक की ख़ुशबू से पूरा माहौल भक्तिमय हो जाता है. लेकिन इस त्योहार का अंत गणपति विसर्जन से होता है, और यहीं हम अनजाने में एक बड़ी गलती कर बैठते हैं.
जब हम प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) और केमिकल वाले रंगों से बनी मूर्तियों को नदियों, तालाबों या समुद्र में विसर्जित करते हैं, तो हम सिर्फ़ मूर्ति नहीं, बल्कि पानी में ज़हर घोल रहे होते हैं. यह ज़हर पानी के जीवों को तो मारता ही है, साथ ही हमारे पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचाता है.
लेकिन अब समय बदल रहा है. लोग अपनी आस्था के साथ-साथ प्रकृति के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी को भी समझ रहे हैं. आइए जानते हैं कि कैसे आप इस गणेश चतुर्थी को इको-फ्रेंडली तरीक़े से मना सकते हैं.
घर पर ही करें गणपति बप्पा का विसर्जन, ये है आसान तरीका
घर पर विसर्जन करना न सिर्फ़ आसान है, बल्कि यह आपको एक अलग तरह का सुकून भी देगा.
मिट्टी के गणेश जी लाएं: सबसे पहला और ज़रूरी कदम है कि आप सिर्फ़ मिट्टी से बनी मूर्ति ही खरीदें. ये मूर्तियां पानी में आसानी से घुल जाती हैं और कोई नुकसान नहीं पहुंचातीं.
एक साफ़ बर्तन लें: एक बाल्टी, टब या किसी बड़े मिट्टी के बर्तन में साफ़ पानी भरें.
विधि-विधान से करें पूजा: जैसे आप बाहर विसर्जन के समय करते हैं, वैसे ही घर पर भी पूरी श्रद्धा से आरती, पूजा और मंत्रों का जाप करें.
मूर्ति को गलने दें: पूजा के बाद धीरे से मूर्ति को पानी में रख दें. मिट्टी की मूर्ति को पूरी तरह गलने में कुछ घंटे लग सकते हैं, इसलिए सब्र रखें.
पानी का सही इस्तेमाल करें: जब मूर्ति पूरी तरह घुल जाए, तो उस पवित्र पानी को अपने घर के गमलों या बगीचे में डाल दें. इस तरह आप बप्पा का आशीर्वाद अपने घर में ही सहेज लेंगे.
सोसायटी में बनाएं आर्टिफिशियल तालाब
आजकल कई सोसाइटी मिलकर एक बड़ा सा टैंक या आर्टिफिशियल तालाब बना लेती हैं, जहाँ सभी लोग मिलकर विसर्जन करते हैं. यह इको-फ्रेंडली विसर्जन का एक बेहतरीन तरीक़ा है. इससे नदियों और झीलों को प्रदूषित होने से बचाया जा सकता है और त्योहार का सामुदायिक आनंद भी बना रहता है.
आस्था और पर्यावरण, दोनों को साथ लेकर चलना ही सच्ची भक्ति है. आइए, इस गणेश चतुर्थी पर एक ज़िम्मेदार नागरिक होने का फ़र्ज़ निभाएं और त्योहार को सही मायनों में पवित्र बनाएं.
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