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Up Kiran,Digital Desk: अमेरिकी अर्थशास्त्री और अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ जेफरी सैक्स ने हाल ही में अमेरिका की विदेश नीति पर कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की कूटनीतिक शैली अब धमकियां और दबाव के आधार पर आधारित हो गई है, जिससे दुनिया भर में तनाव बढ़ रहा है। सैक्स के अनुसार, यह बदलाव अमेरिका की वैश्विक नेतृत्व क्षमता को खतरे में डाल रहा है और दूसरे देशों के लिए चिंता का विषय बन गया है।

कूटनीति से दबंगई की ओर

सैक्स का मानना है कि अमेरिका अब जिम्मेदार और शांतिपूर्ण कूटनीति के बजाय एक तरह की "दबंग रणनीति" अपनाने लगा है। आर्थिक प्रतिबंध, सत्ता परिवर्तन की कोशिशें और वित्तीय दबाव के माध्यम से देशों को झुकाना, यह सब अमेरिकी विदेश नीति का हिस्सा बन गया है। इस दृष्टिकोण के चलते न केवल वैश्विक स्थिरता पर असर पड़ रहा है, बल्कि छोटे और उभरते देशों की संप्रभुता भी खतरे में है।

भारत और BRICS से उम्मीदें बढ़ी

सैक्स ने भारत और BRICS देशों से अमेरिका की एकतरफा नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि गैर-पश्चिमी देशों को अब संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानूनों की रक्षा करनी चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि BRICS देशों को वैश्विक शक्ति संतुलन को मजबूत करने के लिए अधिक सक्रिय रूप से कदम उठाने चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर सवाल

सैक्स ने एक और गंभीर चिंता जताई है—संयुक्त राष्ट्र की घटती प्रभावशीलता। उनका मानना है कि अमेरिका की मनमानी के खिलाफ बड़ी ताकतें एकजुट नहीं हो पा रही हैं, जिससे वैश्विक व्यवस्था की स्थिरता को खतरा हो रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर समय रहते सुधार नहीं किए गए तो अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं अप्रासंगिक हो सकती हैं।

ट्रंप की नीतियों ने कूटनीति को किया प्रकट

जेफरी सैक्स ने ट्रंप प्रशासन के दौर की भी आलोचना की। उनके अनुसार, ट्रंप ने वह सारी नीतियां सार्वजनिक कर दीं, जो पहले पर्दे के पीछे होती थीं। सैक्स ने कहा कि वेनेजुएला, ईरान और ग्रीनलैंड जैसे मुद्दों पर दी गई धमकियां यह दिखाती हैं कि अब अमेरिकी विदेश नीति खुलकर दबंगई की ओर बढ़ रही है। इसके परिणामस्वरूप, दुनिया के बाकी देशों के पास या तो चुप रहने का विकल्प है या फिर संयुक्त रूप से इसका विरोध करने का।