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भारतीय सिनेमा के प्रतिष्ठित अभिनेता और निर्देशक मनोज कुमार का शुक्रवार को मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में निधन हो गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी मौत का कारण कार्डियोजेनिक शॉक बताया गया है, जो कि एक्यूट मायोकार्डियल इंफार्क्शन यानी गंभीर दिल के दौरे के कारण हुआ। इसके साथ ही वे कुछ महीनों से डीकंपेन्सेटेड लिवर सिरोसिस से भी पीड़ित थे, जिसने उनकी सेहत को और जटिल बना दिया था।

उनके निधन ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि हृदय और लिवर संबंधी बीमारियां कितनी घातक हो सकती हैं, खासकर जब वे समय रहते पहचानी या ठीक न की जाएं। आइए विस्तार से समझते हैं कार्डियोजेनिक शॉक और लिवर सिरोसिस क्या हैं, उनके लक्षण क्या होते हैं और कैसे इनसे बचाव किया जा सकता है।

क्या होता है कार्डियोजेनिक शॉक?

कार्डियोजेनिक शॉक एक जानलेवा स्थिति होती है, जिसमें दिल शरीर की जरूरतों के मुताबिक पर्याप्त मात्रा में खून पंप नहीं कर पाता। यह स्थिति आमतौर पर एक्यूट मायोकार्डियल इंफार्क्शन यानी दिल के दौरे के बाद उत्पन्न होती है। इसका असर शरीर के सभी जरूरी अंगों तक खून पहुंचाने की क्षमता पर पड़ता है, जिससे ऑक्सीजन की कमी और अंगों का फेल होना शुरू हो सकता है।

कार्डियोजेनिक शॉक के प्रमुख कारण

दिल का दौरा (मायोकार्डियल इंफार्क्शन): जब दिल की धमनियों में ब्लॉकेज आ जाती है, तो खून का प्रवाह रुक जाता है और दिल की मांसपेशियों को नुकसान होता है।

हार्ट फेलियर: दिल की पंपिंग क्षमता घट जाती है और शरीर को जरूरी ब्लड सप्लाई नहीं मिल पाता।

लो ब्लड प्रेशर: जब दिल पर्याप्त दबाव नहीं बना पाता, तो खून शरीर के जरूरी हिस्सों तक नहीं पहुंचता।

कार्डियोजेनिक शॉक के लक्षण

छाती में तेज़ दर्द या दबाव, जो अक्सर बाजू, पीठ या जबड़े तक फैल सकता है

तेज़ सांस फूलना या सांस लेने में कठिनाई

अत्यधिक थकान और कमजोरी

चक्कर आना या मानसिक भ्रम की स्थिति

दिल की धड़कन तेज़ हो जाना (टैकीकार्डिया)

पसीना आना और त्वचा का ठंडा महसूस होना

कार्डियोजेनिक शॉक का इलाज कैसे होता है?

इमरजेंसी मेडिकल केयर: जैसे ही लक्षण दिखें, तुरंत अस्पताल पहुंचना ज़रूरी है।

कार्डियक कैथीटेराइजेशन: दिल की ब्लॉकेज को हटाने के लिए एंजियोप्लास्टी या स्टेंट डाला जा सकता है।

दवाइयां: दिल की पंपिंग बढ़ाने, दर्द कम करने और मांसपेशियों को सपोर्ट देने के लिए।

आईसीयू में देखभाल: इस गंभीर स्थिति में गहन निगरानी और सपोर्ट सिस्टम जरूरी होता है।

लिवर सिरोसिस क्या है?

लिवर सिरोसिस लिवर की एक गंभीर और अंतिम अवस्था की बीमारी है, जिसमें लिवर के टिश्यूज को स्थायी नुकसान पहुंचता है और वो फाइब्रोसिस (निशान) में बदल जाते हैं। इससे लिवर की कार्यक्षमता लगातार कम होती जाती है। मनोज कुमार भी इस स्थिति से पीड़ित थे, जिसने उनकी हालत को और खराब कर दिया।

लिवर सिरोसिस के मुख्य कारण

पुरानी शराब की लत

वायरल हेपेटाइटिस B और C

नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD)

ऑटोइम्यून लिवर डिजीज और जेनेटिक कारण

लक्षण जिन पर ध्यान देना चाहिए

अत्यधिक थकान और कमजोरी

पीलिया (त्वचा और आंखों का पीला पड़ना)

पेट फूलना और उसमें पानी भरना (एसेसाइटिस)

त्वचा पर खुजली और आसानी से चोट लगना

उल्टी या मल में खून आना

लिवर सिरोसिस का इलाज और मैनेजमेंट

शराब और टॉक्सिन्स से परहेज

पोषण युक्त, संतुलित और लो-सोडियम डाइट

दवाइयां: सूजन और संक्रमण रोकने, पाचन में सुधार और अमोनिया स्तर कम करने के लिए

लिवर ट्रांसप्लांट: गंभीर मामलों में यही एकमात्र उपाय बचता है

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