सीकर के एक ही गांव की 3 बेटियों का कमाल: पहली बार लड़ा चुनाव और 3 अलग-अलग पंचायतों में बनीं सरपंच
राजस्थान के सीकर जिले में नीमकाथाना क्षेत्र की बांसड़ी ग्राम पंचायत के छोटे से गांव छापर की तीन बेटियों ने पंचायती राज चुनाव में मिसाल कायम की है। एक ही परिवेश और मिट्टी में पली-बढ़ीं पूजा वर्मा, मनीषा देवी और सुनीता वर्मा ने पहली बार सीधे चुनावी रण में कदम रखा और शानदार जीत दर्ज कर तीन अलग-अलग ग्राम पंचायतों में सरपंच का ताज अपने नाम किया। सामाजिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से बेहद खास बात यह है कि अनुसूचित जाति (SC) वर्ग से ताल्लुक रखने वाली इन तीनों महिला जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीणों के बीच मजबूत पकड़ बनाते हुए यह सफलता हासिल की है।
तीनों नवनिर्वाचित सरपंचों की जीत का सफर बेहद प्रेरणादायी है। 28 वर्षीय उच्च शिक्षित (बीए-बीएड) पूजा वर्मा ने भगेगा ग्राम पंचायत की सामान्य महिला सीट पर अपनी किस्मत आजमाई और 182 वोटों के अंतर से जीत हासिल कर सरपंच बनीं। वहीं 10वीं तक पढ़ीं 34 वर्षीय मनीषा देवी ने रामपुरा थोई ग्राम पंचायत की एससी आरक्षित सीट से पहली बार ताल ठोकी और सीधे सरपंच पद पर कब्जा जमाया। इसके अलावा साधारण किसान परिवार से आने वाली 37 वर्षीय सुनीता वर्मा ने बुर्जा की ढाणी ग्राम पंचायत में एससी महिला आरक्षित सीट से मैदान संभालते हुए 398 वोटों के भारी अंतर से ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
सरपंच पद की कमान संभालते ही तीनों जन प्रतिनिधियों ने अपने-अपने इलाकों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की रणनीति तैयार कर ली है। पूजा वर्मा अपनी पंचायत में आधुनिक लाइब्रेरी, युवाओं के लिए ओपन जिम और बेहतर डिजिटल सुविधाएं विकसित करने को लेकर संकल्पित हैं। वहीं मनीषा देवी ने महिलाओं को शिक्षा और स्वरोजगार के जरिए आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया है। इसके साथ ही सुनीता वर्मा की पहली प्राथमिकता बच्चों के सुनहरे भविष्य के लिए पंचायत में हाई-टेक डिजिटल लाइब्रेरी का निर्माण कराना है, जिससे ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के समान अवसर मिल सकें।