अग्निवीरों के लिए केंद्र सरकार का अचानक सबसे बड़ा ऐलान! 4 साल बाद घर लौटने वालों की चमकी किस्मत, मिल गया ये बड़ा तोहफा
केंद्र सरकार द्वारा अग्निपथ योजना में बड़ा बदलाव करते हुए अग्निवीरों को दो साल का सेवा विस्तार यानी 'सेकंड टूर ऑफ ड्यूटी' देने के फैसले का उत्तराखंड में सीधा असर देखने को मिल रहा है। इस फैसले के दायरे में फौरी तौर पर प्रदेश के करीब 1200 अग्निवीर आएंगे। इनमें से 800 से अधिक जवान ऐसे थे, जो इसी साल दिसंबर में अपना चार साल का कार्यकाल पूरा कर घर लौटने की तैयारी में थे। आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में उत्तराखंड के लगभग 4200 युवा थल, जल और नभ सेना में अग्निवीर के तौर पर देश सेवा में मुस्तैद हैं।
प्रशासनिक स्तर पर धामी ने किया बड़ा फेरबदल
अग्निवीरों की वापसी और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए पुष्कर सिंह धामी सरकार ने भी प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया है। सेवा पूरी कर लौटने वाले पूर्व अग्निवीरों के रोजगार, कौशल विकास और पुनर्वास का जिम्मा अब कार्मिक विभाग से हटाकर सीधे सैनिक कल्याण विभाग को सौंप दिया गया है। सैनिक कल्याण सचिव युगल किशोर पंत ने इसके आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं। राज्य सरकार पहले ही पुलिस और वन विभाग समेत समूह ‘ग’ के वर्दीधारी पदों पर अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण लागू कर चुकी है। इसके अलावा, स्वरोजगार के लिए ‘वीर उद्यमी योजना’ में 10 प्रतिशत आरक्षण और विभिन्न योजनाओं के तहत 15 से 30 प्रतिशत तक की सब्सिडी का प्रावधान तय किया गया है। सेवा विस्तार के नए नियमों के बाद अब सरकार को अपने छह सदस्यीय अग्निवीर प्रकोष्ठ की समयसीमा में भी बदलाव करना पड़ेगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्र के इस कदम का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कैबिनेट का आभार जताया है। सीएम ने कहा कि दो साल की अतिरिक्त सेवा से युवाओं के सामर्थ्य और राष्ट्रसेवा के प्रति उनके जज्बे को नई पहचान और सम्मान मिलेगा। अकेले नैनीताल जिले की बात करें तो जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल (सेनि) रमेश भट्ट के अनुसार, 31 जनवरी तक 144 जवान सेवानिवृत्त होने की कगार पर थे, जिनमें से 123 अग्निवीरों का कार्यकाल इसी 31 दिसंबर को खत्म हो रहा था, जिन्हें अब सेवा विस्तार से सीधी राहत मिली है।
हालांकि, सेवा विस्तार के इस ऐलान पर सैन्य पृष्ठभूमि से जुड़े परिवारों और जवानों के परिजनों में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुमाऊं और गढ़वाल के कई परिजनों का साफ कहना है कि महज दो साल का एक्सटेंशन युवाओं की भविष्य की अनिश्चितता को खत्म नहीं कर सकता। हल्द्वानी निवासी देवेंद्र मेहरा, जिनका बेटा लवकुश डेढ़ साल से अग्निवीर है, का तर्क है कि सेवाकाल छह साल के बजाय कम से कम 15 साल होना चाहिए, ताकि जवानों को पेंशन और सामाजिक सुरक्षा का पूरा हक मिल सके। वहीं, अन्य अभिभावकों का भी कहना है कि सीमाओं की रक्षा करने वाले जांबाजों को संविदा जैसी व्यवस्था के बजाय नियमित सेवा और पूर्ण स्थायित्व मिलना चाहिए, तभी सही मायनों में युवाओं का भविष्य सुरक्षित होगा।