कब से शुरू हो रहा है पवित्र कार्तिक स्नान? जानिए तुलसी पूजा
सनातन हिंदू पंचांग और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वर्ष भर में आने वाले सभी महीनों में कार्तिक मास (Kartik Maas) को सबसे अधिक पवित्र, फलदायी और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर माना गया है। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए कार्तिक महीने के दौरान किए जाने वाले स्नान, दान, व्रत और अनुष्ठानों का विशेष महत्व बताया गया है। शरद पूर्णिमा के अगले दिन से शुरू होने वाला यह पवित्र महीना कार्तिक स्नान के रूप में जाना जाता है, जिसमें देश भर के लाखों श्रद्धालु गंगा, यमुना या अन्य पवित्र नदियों के तट पर अहले सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करते हैं। जैसे-जैसे साल 2026 आगे बढ़ रहा है, सनातन धर्मावलಂಬियों के मन में यह उत्सुकता लगातार बनी हुई है कि इस वर्ष कार्तिक स्नान की सटीक शुरुआत कब से हो रही है और इसका समापन किस दिन होगा। यदि आप भी कार्तिक मास के इस पावन पर्व पर स्नान, व्रत और पूजन करने की योजना बना रहे हैं, तो आइए पंचांग के अनुसार जानते हैं कि साल 2026 में कार्तिक स्नान से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण तारीखें और इसके नियम क्या हैं।
साल 2026 में कब से शुरू होगा कार्तिक स्नान और कब होगी इसकी समाप्ति?
पंचांग गणना के अनुसार, इस वर्ष कार्तिक मास की शुरुआत शरद पूर्णिमा या उसके अगले दिन यानी प्रतिपदा तिथि से मानी जाती है। कार्तिक स्नान की यह पावन परंपरा पूरे एक महीने तक चलती है, जो शरद पूर्णिमा से शुरू होकर कार्तिक पूर्णिमा (जिसे देव दीपावली भी कहा जाता है) के दिन समाप्त होती है। साल 2026 में कार्तिक मास के दौरान नदी स्नान और विशेष व्रतों की शुरुआत अक्टूबर के अंतिम सप्ताह या नवंबर के शुरुआती दिनों में होगी और इसका समापन कार्तिक पूर्णिमा के दिन होगा। इस पूरे महीने के दौरान सुबह सूर्योदय से पहले उठकर पवित्र नदियों या घर पर ही गंगा जल मिले पानी से स्नान करने का विधान है। धार्मिक जानकारों का मानना है कि जो व्यक्ति पूरे एक महीने तक नियमपूर्वक कार्तिक स्नान करता है, उसके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे विष्णु लोक की प्राप्ति होती है।
कार्तिक मास में प्रतिदिन तुलसी पूजा का क्यों माना जाता है विशेष महत्व?
कार्तिक महीने की धार्मिक आचार्यों द्वारा बताई गई सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस पूरे मास में भगवान विष्णु के साथ-साथ मां तुलसी की पूजा करना अत्यंत अनिवार्य और फलदायी माना गया है। हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को बहुत ही पवित्र और साक्षात माता लक्ष्मी का रूप माना जाता है। कार्तिक मास के दौरान रोजाना सुबह और शाम के समय तुलसी के पौधे के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाया जाता है और उनकी परिक्रमा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि जो परिवार कार्तिक के महीने में नियमित रूप से तुलसी के पौधे की पूजा करता है, उनके घर में कभी भी सुख-शांति और धन-धान्य की कमी नहीं होती है। इसके अलावा, इसी महीने में तुलसी विवाह (Tulsi Vivah) का पावन पर्व भी मनाया जाता है, जिसे एक बड़े उत्सव के रूप में आयोजित किया जाता है।
दीपदान की परंपरा: नदियों, मंदिरों और चौखट पर दीये जलाने का अध्यात्म
कार्तिक स्नान के साथ-साथ इस पूरे महीने में संध्या के समय दीपदान (Deepdan) करने का भी महात्मय शास्त्रों में विस्तार से बताया गया है। संध्या काल में मुख्य द्वार पर, मंदिरों में, पीपल के पेड़ के नीचे और विशेषकर तुलसी के पौधे के पास दीये प्रज्वलित किए जाते हैं। मान्यता है कि कार्तिक मास में दीपदान करने से जीवन के सारे अंधकार दूर होते हैं और अज्ञानता का नाश होता है। भगवान विष्णु चार महीने की योग निद्रा के बाद इसी मास में जागृत होते हैं, इसलिए इस महीने को देवताओं का महीना भी कहा जाता है। नदियों के घाटों पर दीप जलाने से पितरों को भी शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद परिवार पर हमेशा बना रहता है।
कार्तिक स्नान और व्रत के दौरान किन नियमों का पालन करना है जरूरी?
यदि आप भी साल 2026 में कार्तिक स्नान का व्रत और नियम का पालन करने जा रहे हैं, तो कुछ खास बातों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है। इस पूरे महीने में खान-पान को लेकर संयम बरता जाता है और कई लोग सात्विक भोजन, विशेषकर मूंग की दाल और हरी सब्जियों का सेवन करते हैं। इसके अलावा, जमीन पर सोना, ब्रह्मचर्य का पालन करना और दूसरों के प्रति मन में सकारात्मक भाव रखना इस व्रत का मुख्य अंग माना गया है। दान-पुण्य के कार्यों का इस महीने में सबसे अधिक फल मिलता है, इसलिए अपनी सामर्थ्य के अनुसार गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और गर्म कपड़ों का दान करना चाहिए।
कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली के साथ होगा इस पावन मास का समापन
कार्तिक स्नान का यह पूरा अनुष्ठान कार्तिक पूर्णिमा के दिन भव्य तरीके से संपन्न होता है। इस दिन उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शहर वाराणसी (काशी) के घाटों पर लाखों दीप जलाकर देव दीपावली मनाई जाती है, जिसे देखने के लिए दुनिया भर से पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं। कार्तिक पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी में स्नान करने के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराने और दान देने से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इस प्रकार, कार्तिक स्नान का यह महीना शरीर, मन और आत्मा को पवित्र करने का एक बेहतरीन अवसर प्रदान करता है, जिसे हर सनातन धर्मी को पूरी निष्ठा के साथ मनाना चाहिए।