अखिलेश पहुंचे रामपुर जेल तो भड़के राजभर! लगाया अब तक का सबसे बड़ा आरोप-'इन्हीं ने भिजवाया था जेल!'
उत्तर प्रदेश की सियासत में आज का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव रामपुर जिला जेल पहुंचे हैं, जहां वह पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से मुलाकात कर रहे हैं। करीब एक साल 14 दिन के लंबे अंतराल के बाद हो रही दोनों दिग्गजों की इस मुलाकात ने यूपी के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। जेल में आजम खान से बातचीत के बाद सपा सुप्रीमो उनके आवास जाकर परिजनों से भी हालचाल जानेंगे। इससे पहले दोनों नेताओं की मुलाकात 8 अक्टूबर 2025 को हुई थी। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए पश्चिमी यूपी के समीकरणों के लिहाज से इस दौरे को काफी अहम माना जा रहा है।
सपा अध्यक्ष के रामपुर पहुंचते ही प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने तीखा सियासी हमला बोल दिया। राजभर ने सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि आजम खान को जेल भिजवाने के पीछे खुद अखिलेश यादव का हाथ था और अब जेल जाकर मिलना सिर्फ एक चुनावी जुमला खड़ा करने का प्रयास है। राजभर ने दावा किया कि अखिलेश यादव केवल मुस्लिम वोट बैंक को साधने के लिए यह सियासी दांव चल रहे हैं। उन्होंने यह भी जोड़ दिया कि अब मुस्लिम समुदाय समझ चुका है और वह सपा से किसी मुस्लिम चेहरे को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने की मांग कर रहा है, तभी उन्हें समर्थन मिलेगा।
दूसरी तरफ, इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात के सियासी एजेंडे को लेकर स्थानीय सपा नेतृत्व बेहद सतर्क नजर आ रहा है। सपा नगर अध्यक्ष आसिम राजा ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष आजम खान से मिलने पहुंचे हैं, लेकिन इस मुलाकात का मुख्य एजेंडा क्या है, यह सिर्फ अखिलेश यादव ही स्पष्ट कर सकते हैं। वहीं रामपुर सपा जिलाध्यक्ष अजय सागर ने बताया कि इस दौरे को लेकर कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है और सभी व्यवस्थाएं पहले ही पूरी कर ली गई थीं।
पूर्व मुख्यमंत्री के दौरे के चलते रामपुर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। जौहर यूनिवर्सिटी स्थित हेलीपैड से लेकर जिला जेल और आजम खान के निजी आवास तक सुरक्षा के कड़े घेरे बनाए गए हैं। शहर के सभी संवेदनशील चौराहों और मुख्य मार्गों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। रामपुर हमेशा से सपा की मजबूत सियासी जमीन रहा है, जहां 2022 के विधानसभा चुनाव में जिले की पांच में से तीन सीटों पर साइकिल ने कब्जा जमाया था। ऐसे में जानकारों का मानना है कि अखिलेश यादव का यह कदम पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी के कोर वोटरों को एकजुट रखने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है।