2027 चुनाव से पहले नैनीताल में 78 हजार वोटर गायब, अकेले हल्द्वानी में घटे 30,705 नाम; सियासी गणित बिगड़ा
उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी बिसात बिछने से पहले ही नैनीताल जिले के नए वोटर आंकड़ों ने भाजपा और कांग्रेस दोनों खेमों में खलबली मचा दी है। निर्वाचन विभाग की ताजा मतदाता सूची के अनुसार, 2022 के मुकाबले जिले की छह विधानसभा सीटों पर कुल 78,352 मतदाता कम दर्ज किए गए हैं। सबसे तगड़ा झटका हल्द्वानी सीट पर लगा है, जहां एक झटके में 30,705 मतदाताओं के नाम कट गए। यह आंकड़ा कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश की पिछली 7,814 वोटों की जीत के अंतर से लगभग चार गुना ज्यादा है, जिससे इस सीट का पूरा सियासी समीकरण उलट-पुलट हो सकता है।
तीन अक्तूबर को जारी अंतिम मतदाता सूची के मुताबिक, नैनीताल जिले में अब कुल मतदाताओं की संख्या 6,97,547 रह गई है, जिसमें 3,63,095 पुरुष और 3,34,440 महिला वोटर शामिल हैं। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में यह आंकड़ा 7,75,899 था। प्रदेश भर में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद करीब नौ लाख मतदाताओं की कमी दर्ज की गई है, लेकिन नैनीताल जिले में आई भारी गिरावट ने दोनों प्रमुख दलों को बूथवार रणनीति दोबारा तैयार करने पर मजबूर कर दिया है।
सीटवार आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले की सभी छह विधानसभाओं में मतदाताओं की तादाद गिरी है। हल्द्वानी में वोटर संख्या 1,51,396 से घटकर 1,20,691 पर आ गई है। लालकुआं में 1,20,392 से घटकर 1,08,521 (11,871 कम), भीमताल में 1,00,634 से घटकर 97,563 (3,071 कम), नैनीताल सीट पर 1,09,970 से घटकर 93,122 (16,848 कम), कालाढूंगी में 1,71,693 से घटकर 1,65,430 (6,209 कम) और रामनगर में 1,21,808 से घटकर 1,12,220 (9,648 कम) मतदाता रह गए हैं। यह स्थिति तब सामने आई है जब जानकारों का मानना है कि पिछले पांच वर्षों में जिले की कुल आबादी में एक लाख से अधिक का इजाफा हुआ है।
मतदाताओं की संख्या में इस भारी फेरबदल पर उप जिला निर्वाचन अधिकारी विवेक राय ने स्पष्ट किया है कि यह कमी केवल एसआईआर अभियान की वजह से नहीं हुई है। नियमित पुनरीक्षण, मृत व अपात्र लोगों के नाम हटाने, माइग्रेशन और लोगों द्वारा स्वेच्छा से नाम कटवाने के कारण भी यह बदलाव हुआ है। उन्होंने बताया कि पूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत ही नाम हटाए गए हैं। अभियान के दौरान लगभग 2.35 लाख लोगों को नोटिस भेजे गए थे, जिनमें से घर-घर सत्यापन के समय करीब 71 हजार लोग पते पर नहीं मिले, जिनका दोबारा सत्यापन किया जा रहा है। उन्होंने यह भी साफ किया कि जो भी पात्र नागरिक छूट गए हैं, वे फॉर्म-6 भरकर अब भी अपना नाम सूची में दर्ज करा सकते हैं।
यह नई स्थिति इसलिए भी बेहद संवेदनशील है क्योंकि 2022 के चुनाव में कई सीटों पर जीत का अंतर काफी कम था। पिछली बार कालाढूंगी से भाजपा के बंशीधर भगत ने 23,931 मतों की सबसे बड़ी जीत हासिल की थी, जबकि लालकुआं में मोहन सिंह बिष्ट 17,527, भीमताल में राम सिंह कैड़ा 9,844, नैनीताल में सरिता आर्या 7,881 और रामनगर में दीवान सिंह बिष्ट 4,745 मतों से जीते थे। वहीं हल्द्वानी में सुमित हृदयेश 7,814 वोटों से विजयी रहे थे। अब जब अकेले हल्द्वानी में 30 हजार से ज्यादा और पूरे जिले में 78 हजार से अधिक वोटर कम हो चुके हैं, तो आने वाले चुनाव में हर एक वोट की कीमत और दोनों दलों की सिरदर्दी बढ़ना तय है।