शिक्षक को फंसाया, जंगल में गाड़ा नवजात का शव... फिर DNA रिपोर्ट ने खोला वो खौफनाक सच जिसे जानकर सन्न रह गया उत्तराखंड!
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के अस्कोट क्षेत्र से सामने आए सनसनीखेज दुष्कर्म मामले में पुलिस की वैज्ञानिक जांच और डीएनए रिपोर्ट ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। जिस स्कूली शिक्षक योगेश कुमार पांडे पर छात्रा से दुष्कर्म का गंभीर आरोप लगाकर जेल भेजा गया था, वह पूरी तरह निर्दोष साबित हुए हैं। क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) रुद्रपुर से आई डीएनए जांच रिपोर्ट से साफ हो गया है कि मृत नवजात का असली पिता शिक्षक नहीं, बल्कि गांव का ही एक किशोर है, जो छात्रा का परिचित दोस्त बताया जा रहा है। सच सामने आते ही पुलिस ने आरोपी किशोर को संरक्षण में लेकर राजकीय बाल संप्रेक्षण गृह, अल्मोड़ा भेज दिया है।
यह पूरा मामला बीते जून महीने में तब सामने आया था जब दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा की अचानक तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे कनालीछीना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) लेकर पहुंचे थे। डॉक्टरों की जांच में छात्रा के हाल ही में प्रसव से गुजरने की बात उजागर हुई, जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस को सूचित किया। परिजनों और पीड़िता के शुरुआती बयानों के आधार पर अस्कोट पुलिस ने स्कूल के शिक्षक योगेश कुमार पांडे के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 65(1) और पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।
घटना में नया मोड़ तब आया जब पूछताछ में परिजनों ने कबूल किया कि छात्रा ने छह से सात माह के एक मृत शिशु को जन्म दिया था, जिसे उन्होंने गांव के पास जंगल में दफना दिया था। इसके बाद 10 जून को पुलिस की 40 सदस्यीय टीम ने सघन तलाशी अभियान चलाकर जंगल और गधेरे से नवजात के अवशेष बरामद किए। जांच को वैज्ञानिक आधार देने के लिए पुलिस ने नवजात के अवशेषों और आरोपी शिक्षक के जैविक नमूने लेकर रुद्रपुर विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजे। लैब की रिपोर्ट में शिक्षक का डीएनए नवजात से बिल्कुल मैच नहीं हुआ, जिससे पुलिस के कान खड़े हो गए।
सच्चाई तक पहुंचने के लिए अस्कोट कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक रवींद्र यादव के नेतृत्व में पुलिस टीम ने दो अन्य संदिग्धों के ब्लड सैंपल लिए और 12 अक्टूबर को दोबारा परीक्षण के लिए भेजे। इस बार आई रिपोर्ट पॉजिटिव रही और छात्रा के गांव के ही किशोर के मृत शिशु का पिता होने की 100 फीसदी पुष्टि हो गई। यदि पुलिस जंगलों से नवजात के अवशेष बरामद कर फॉरेंसिक जांच नहीं कराती, तो शायद एक बेकसूर शिक्षक हमेशा के लिए झूठे कलंक का शिकार बना रहता। वैज्ञानिक विवेचना ने इस पूरे अंधे केस को सुलझाकर दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया है।