भारत-नेपाल बॉर्डर पर बड़ा एक्शन, 25 मासूम बच्चों को लेकर भारत में घुस रहा था शख्स; वजह जानें
भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी से एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां उत्तराखंड के चंपावत जिले में स्थित बनबसा चेकपोस्ट से 25 नेपाली बच्चों को रोककर वापस नेपाल भेज दिया गया। प्राथमिक जानकारी के अनुसार, 10 साल से कम उम्र के इन मासूमों को तिब्बती भाषा की पढ़ाई के बहाने देहरादून ले जाया जा रहा था। कंचनपुर के गड्डाचौकी नाके से सीमा पार कर जैसे ही यह दल भारतीय क्षेत्र के बनबसा चेकपोस्ट पहुंचा, भारतीय सुरक्षा अधिकारियों ने संदिग्ध गतिविधि और जरूरी दस्तावेजों की कमी को देखते हुए पूरे दल को हिरासत में लेकर आगे बढ़ने से रोक दिया।
वापस लौटाए गए सभी 25 बच्चे नेपाल के सुदूर हुम्ला जिले के सिमकोट स्थित सेयरा गांव के रहने वाले बताए जा रहे हैं। इन्हें पंचपविर बुढ़ा नामक व्यक्ति कंचनपुर नाके के जरिए भारतीय सीमा में दाखिल करा रहा था। भारतीय अधिकारियों द्वारा लौटाए जाने के बाद इन बच्चों को सीमावर्ती नेपाली जिले कंचनपुर की स्थानीय पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है। पुलिस ने बच्चों को सुरक्षित अपनी कस्टडी में लेकर इस पूरे मामले की गहन तफ्तीश शुरू कर दी है कि आखिर इतने छोटे बच्चों को सीमा पार ले जाने का असली मकसद क्या था।
नेपाली पुलिस के मुताबिक, बच्चों को देहरादून के किसी संस्थान में तिब्बती भाषा सिखाने की बात कही जा रही है, लेकिन जांच में अब तक किसी मान्यता प्राप्त स्कूल या रजिस्टर्ड शैक्षणिक संस्थान का नाम या दस्तावेज सामने नहीं आए हैं। इसके अलावा, इतनी कम उम्र के बच्चों को दूसरे देश ले जाने के लिए उनके परिजनों से कोई वैध लिखित सहमति ली गई थी या नहीं, इस पर भी गंभीर सवाल खड़े हैं। कंचनपुर पुलिस मानव तस्करी के अंदेशे को ध्यान में रखते हुए पूरे नेटवर्क और बिचौलियों की भूमिका की बारीक जांच कर रही है।